पाकिस्तान सरकार संकट में

गृहमंत्री रहमान मलिक
Image caption गृहमंत्री रहमान मलिक के ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी वारंट जारी हुआ है

सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद विवादास्पद अध्यादेश से लाभ उठाने वाले मंत्रियों की वजह से केंद्रीय सरकार दबाव में आ गई है.

पाकिस्तान की एक अदालत ने गृह मंत्री रहमान मलिक की गिरफ्तारी के वारंट जारी कर दिए हैं. इससे पहले रक्षामंत्री चौधरी अहमद मुख़्तियार को चीन की यात्रा पर जाने से रोक दिया गया था.

रहमान मलिक के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के आरोप हैं और अध्यादेश से लाभान्वित होने वालों में चौधरी अहमद मुख़्तियार का नाम भी शामिल है.

उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने हाल के एक फैसले में राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी के अलावा संघीय कैबिनेट के चार सदस्यों के साथ-साथ कई वरिष्ठ अधिकारियों को क्षमा या राहत देने वाले क़ानून को असंवैधानिक क़रार दिया था.

इसके बाद से ही कई अधिकारी जाँच के दायरे में आ गए हैं और इनके खिलाफ़ लगे आरोपों की जाँच का काम फिर से शुरू हो गया है.

वैसे सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी पर भी दबाव बना हुआ है और पाकिस्तान में एक बड़े राजनीतिक संकट के संकेत दिख रहे हैं.

संकट के संकेत

Image caption सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने देश की राजनीति में खलबली मचा दी है

पाकिस्तान की एक अदालत ने गृहमंत्री रहमान मलिक की गिरफ्तारी के वारंट जारी कर दिए हैं जबकि सिंध प्रांत के मंत्री आग़ा सिराज दुर्रानी और ईरान में पाकिस्तान के राजदूत एमबी अब्बासी सहित 52 अन्य अभियुक्तों को नोटिस जारी दिए हैं.

ये सभी अभियुक्त भ्रष्टाचार और अन्य मामलों में ज़मानत पर रिहा थे.

कराची की एकाउंटेबिलिटी कोर्ट के जज मीर मोहम्मद शेख़ ने गृह मंत्री रहमान मलिक के ख़िलाफ गिरफ्तारी के वारंट भ्रष्टाचार निरोधक संस्था नेशनल एकाउंटेबिलिटी ब्यूरो की याचिका पर जारी किया है.

रहमान मलिक के ख़िलाफ भ्रष्टाचार का एक मामला दर्ज था जब वे संघीय जांच एजेंसी के उप-निदेशक थे और इस मामले में उन्हें फ़रार घोषित कर दिया गया था.

उधर सुप्रीम कोर्ट में एक नागरिक इक़बाल काज़मी ने याचिका दायर की है जिसमें अदालत से अनुरोध किया गया है कि विवादास्पद अध्यादेश से लाभ उठाने वाले सरकारी कर्मचारियों को पदों से हटाया जाए और राजनेताओं को अयोग्य क़रार दिया जाए.

इससे पहले गुरुवार की रात रक्षामंत्री चौधरी अहमद मुख़्तियार को गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने विदेश जाने की अनुमति नहीं दी थी और उन्हें विमान में चढ़ने से रोक दिया गया था.

रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि चौधरी अहमद मुख़्तियार अब चीन नहीं जा रहे हैं और उन की जगह नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं.

रक्षा मंत्री को जब विदेश जाने से रोका गया तो देश भर में यह अफवाह उड़ी कि राष्ट्रपति ज़रदारी की सत्ता पलट कर दी गई है. लेकिन राष्ट्रपति भवन के प्रवक्ता फरहातुल्लाह बाबर ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा है कि कोई सत्ता पलट नहीं हो रही है.

भ्रष्टाचार निरोधक संस्था नेशनल एकाउंटेबिलिटी ब्यूरो ने को लगभग 250 लोगों की विदेशी यात्रा पर रोक लगाने के लिए गृह मंत्रालय को लिखा था और उस ने भ्रष्टाचार के मामलों की जांच भी शुरु कर दी है.

उधर लाहौर में नेशनल एकाउंटेबिलिटी ब्यूरो ने शुक्रवार को पंजाब प्रांत के 32 लोगों के ख़िलाफ़ मामले फिर से खोल दिए हैं और जाँच का दायरा भी बढ़ा दिया है.

इन लोगों में पीपुल्स पार्टी के वरिष्ठ नेता जहाँगीर बदर और पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की माता नुसरत भुट्टो के नाम शामिल हैं.

पीपुल्स पार्टी में चिंता

Image caption ज़रदारी पर भी पद छोड़ने का दबाव बढ़ता जा रहा है

इस घटनाक्रम के बाद पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के भीतर राजनीतिक पारा चढ़ा हुआ है और अदालत के फैसले के बाद विवादास्पद अध्यादेश से लाभान्वित होने वाले मंत्रियों के भविष्य पर विचार विमर्श किया जा रहा है.

पीपुल्स पार्टी की सरकार ने विवादास्पद अध्यादेश के बारे में फैसला आने के बाद कहा था वह अदालती फैसले का आदर करती है. लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस फैसले के बाद पार्टी के भीतर चिंता का माहौल है.

उनका कहना है कि जब अधिकारियों ने रक्षा मंत्री चौधरी अहमद मुख़्तियार को विदेश जाने की अनुमति नहीं दी तो इस चिंता में इज़ाफ़ा हुआ है.

अंग्रेज़ी अख़बार डैली डॉन के अनुसार जानकार मानते हैं कि राष्ट्रपति आसिफ ज़रदारी के साथ-साथ इस फैसले ने प्रधानमंत्री यूसुफ रज़ा गिलानी को भी परेशान कर दिया है.

अदालती फैसले ने प्रधानमंत्री पर दबाव डाला है कि वह अध्यादेश से लाभान्वित होने वाले मंत्रियों को मंत्रिमंडल से हटा दें.

अख़बार लिखता है कि प्रधानमंत्री के लिए भी दुविधा है कि अगर वे मंत्रियों को उनके पदों से हटा देते हैं तो इससे राष्ट्रपति आसिफ ज़रदारी पर दबाव बढ़ेगा क्योंकि वे पार्टी के सह-अध्यक्ष हैं.

राष्ट्रपति आसिफ ज़रदारी ने पीपुल्स पार्टी के नेतृत्व में चलने वाली सरकार को संकट से निकालने के लिए शनिवार को पार्टी की केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई है.

इसके अलावा पार्टी ने इस संदर्भ में क़ानूनी विशेषज्ञों से सलाह शुरु कर दी है.

राष्ट्रपति भवन के प्रवक्ता फ़रहातुल्लाह बाबर के मुताबिक राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी और मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट के प्रमुख अल्ताफ हुसैन के बीच अदालती फैसले से उपजे राजनीतिक संकट पर चर्चा हुई है.

मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट गठबंधन सरकार का हिस्सा है और उसके प्रमुख सहित पार्टी के कई नेता अध्यादेश से लाभ उठाने वालों में शामिल हैं.

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