नई अफ़ग़ान-पाकिस्तान नीति और बढ़ते हमले

  • 25 दिसंबर 2009
Image caption अमरीका ने अफ़ग़ानिस्तान में सैनिकों की संख्या बढ़ाने की घोषणा की

पश्चिमी देशों के लिए वर्ष 2009 में अफ़ग़ानिस्तान इराक़ से अधिक महत्वपूर्ण रहा.

अमरीकी रक्षा सचिव रोबर्ट्स गेट्स ने अफ़ग़ानिस्ताम के अमरीका के लिए सबसे बड़ा इम्तिहान बताया था.

इस साल चर्चा का केंद्र नई अफ़ग़ान-पाकिस्तान नीति और विदेशी सैनिकों की संख्या रही.

साथ ही अफ़ग़ानिस्तान में लगातार बढ़ते हमले भी चिंता का विषय बने रहे.

नई नीति की घोषणा

अमरीका की अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान नीति का लंबे समय से इंतज़ार किया जा रहा था.

Image caption ओबामा ने अफ़ग़ानिस्तान में सैनिकों को बढ़ाने की घोषणा की

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने घोषणा की कि अगले छह महीनों में अफ़गानिस्तान में 30 हज़ार और सैनिक भेजे जाएँगे.

फ़िलहाल वहाँ 68 हज़ार अमरीकी सैनिक और अन्य नैटो देशों के 48 हज़ार सैनिक तैनात हैं.

इस तैनाती के बाद अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी सैनिकों की संख्या एक लाख से ऊपर हो जाएगी.

लेकिन साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि 18 महीने के बाद अफ़ग़ानिस्तान में तैनात सैनिकों की वहाँ से वापसी शुरु हो जाएगी.

राष्ट्रपति ओबामा ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान की स्थित की वियतनाम में अमरीकी कार्रवाई के साथ तुलना नहीं की जा सकती.

उनका तर्क था कि अमरीका की अल क़ायदा- तालेबान के ख़िलाफ़ कार्रवाई को 43 देशों का समर्थन हासिल है और अफ़ग़ानिस्तान में विद्रोहियों की लोकप्रियता सीमित है.

अमरीकियों की सुरक्षा पर बार-बार बल देते हुए ओबामा ने कहा, "यदि मुझे न लगता कि अमरीकियों की सुरक्षा दांव पर है तो मैं हर अमरीकी सैनिक को घर बुला लेता. जब मैं ये फ़ैसला ले रहा हूँ तो मुझे अहसास है कि अमरीकियों की सुरक्षा अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान में दांव पर है. अल क़ायदा पर दबाव बनाए रखना ज़रूरी है. ये दोनों देश अल क़ायदा के हिंसक चरमपंथ का केंद्र हैं और ये कोई काल्पनिक ख़तरा नहीं है."

ओबामा ने कहा कि अमरीका का लक्ष्य अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान में अल क़ायदा के तंत्र को ध्वस्त करना है.

करज़ई ने दोबारा शपथ ली

काफ़ी विवाद के बाद अफ़ग़ानिस्तान के चुनाव आयोग ने देश में दूसरे दौर का राष्ट्रपति चुनाव रद्द कर हामिद करज़ई को निर्वाचित राष्ट्रपति घोषित कर दिया गया.

Image caption विवादों के बाद करज़ई दोबारा राष्ट्रपति घोषित किए गए

चुनाव आयोग ने ये घोषणा हामिद करज़ई के विरोधी अब्दुल्ला अब्दुल्ला के चुनाव से हटने की घोषणा के एक दिन बाद की.

अफ़ग़ानिस्तान में पहले दौर का चुनाव 20 अगस्त को हुआ था और प्रारंभिक मतगणना में हामिद करज़ई की जीत पक्की बताई जा रही थी.

लेकिन बाद में जाँच में चुनाव में व्यापक धाँधली के आरोपों को सही पाया गया जिसके बाद पहले दौर के चुनाव में कोई फ़ैसला नहीं हो पाया और तब दूसरे दौर के चुनाव की नौबत आई.

अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन, अमरीकी सेनेटर जॉन केरी, ब्रिटिश प्रधानमंत्री गोर्डन ब्राउन जैसे कई अंतरराष्ट्रीय नेताओं ने करज़ई को दूसरे दौर का चुनाव करवाने के लिए राज़ी करवाने का प्रयास किया था जिसके बाद वे इसके लिए तैयार हो गए.

पर करज़ई के विरोधी अब्दुल्ला अब्दुल्ला ने आयोग के महत्वपूर्ण चुनाव अधिकारियों को हटाए जाने की माँग की थी. इस चुनाव आयोग को करज़ई समर्थक समझा जाता है.

लेकिन ऐसा नहीं होने के बाद अब्दुल्ला अब्दुल्ला ने ये कहते हुए चुनाव से हटने की घोषणा कर दी कि वे नहीं समझते कि दूसरे दौर का चुनाव निष्पक्षता से करवाया जा सकता है.

भ्रष्टाचार समाप्ति का दबाव

हामिद करज़ई ने दूसरी बार राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद अफ़ग़ानिस्तान में व्याप्त भ्रष्टाचार को ख़त्म करने का वादा किया.

Image caption करज़ई सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं

करज़ई ने पिछले मंत्रिमंडल में शामिल खनन मंत्री और हज़ मामलों के मंत्री को इस बार मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया क्योंकि इन दोनों के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के आरोप थे.

दरअसल अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने चेतावनी दी थी कि अगर अफ़ग़ानिस्तान अमरीकी मदद जारी रखना चाहता है तो उन्हें भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए कुछ करना ही पड़ेगा.

हिलेरी क्लिंटन ने कहा कि करज़ई को एक बड़ा न्यायाधिकरण और एक भ्रष्टाचार विरोधी आयोग गठित करना चाहिए.

अफ़ग़ान राष्ट्रपति पर हाल के समय में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए पश्चिमी देशों की और से दबाव बढ़ता जा रहा है.

अफ़ग़ानिस्तान दुनिया का सबसे बड़ा अफ़ीम उत्पादक देश है और संयुक्त राष्ट्र के अनुसार वहाँ भ्रष्टाचार की जड़ नशीले पदार्थों का कारोबार है.

संयुक्त राष्ट्र का ये भी कहना रहा है कि अफ़ग़ानिस्तान को अभूतपूर्व रूप से मिलनेवाली सहायता और इस राशि के जल्द से जल्द ख़र्च किए जाने के दबाव से भी भ्रष्ट्राचार को बढ़ावा मिला है.

भारतीय दूतावास पर हमला

अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में शहर के बीचों-बीच भारतीय दूतावास के पास एक कार बम धमाका हुआ है जिसमें 17 लोग मार गए थे और 60 से अधिक घायल हुए थे.

Image caption हमले से भारतीय दूतावास को भारी नुक़सान पहुँचा था

तालेबान ने इस धमाके की ज़िम्मेदारी ली और कहा था कि आत्मघाती हमलावर ने यह धमाका किया और इसमें भारतीय दूतावास को निशाना बनाया गया था.

इस धमाके से भारतीय दूतावास की एक दीवार को क्षति पहुँची थी और इमारत में कई खिड़कियाँ-दरवाज़े टूट गए थे..

इसके पहले जुलाई, 2008 में भी भारतीय दूतावास को निशाना बनाया गया था.

भारत ने इस हमले के लिए पाकिस्तानी तत्वों पर उंगली उठाई थी.

भारत ने कहा था कि अफ़ग़ानिस्तान में उसके दूतावास पर हुआ हमला उन लोगों का काम है, जो भारत-अफ़ग़ानिस्तान की दोस्ती को नुक़सान पहुँचाना चाहते हैं.

भारत का कहना था कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय और अफ़ग़ानिस्तान के लोगों को ऐसे आतंकवादी हमले और सीमा पार बैठे उनके आकाओं से ख़तरा है.

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