तमिल विद्रोहियों का सफ़ाया

  • 25 दिसंबर 2009
प्रभाकरण
Image caption पच्चीस वर्षों के गृह युद्ध के बाद प्रभाकरण मारे गए थे

पच्चीस वर्षों के गृहयुद्ध के बाद श्रीलंका सरकार ने मई में तमिल विद्रोहियों के संगठन एलटीटीई के साथ निर्णायक संघर्ष किया था.

इसके बाद एलटीटीई के ख़त्म हो जाने की घोषणा कर दी गई.

तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई के प्रमुख वेलुपिल्लई प्रभाकरण मारे गए.

प्रभाकरण अपने दो शीर्ष कमांडरों के साथ देश के उत्तर में सेना के साथ हो रहे संघर्ष में मारे गए.

इससे पहले प्रभाकरण के बेटे चार्ल्स एंथनी के अलावा एलटीटीई के तीन अन्य प्रमुख नेता भी मारे गए थे.

इस ख़बर के आने के बाद श्रीलंका के कई हिस्सों में लोगों ने जश्न मनाया.

मानवाधिकारों का हनन

लेकिन इसके साथ ही श्रीलंका में मानवाधिकारों के हनन की बात सामने आने लगी और इसकी जाँच की माँग शुरू हो गई.

Image caption श्रीलंका में एक लाख से अधिक लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख बान कि मून ने श्रीलंका का दौरा किया.

श्रीलंका के शिविरों में एक लाख 30 हज़ार से भी ज्यादा लोग रह रहे थे.

सरकार ने हाल में घोषणा की है कि शिविरों में रह रहे सभी लोगों का जनवरी तक पुनर्वास कर दिया जाएगा.

अब तक शिविरों में रह रहे लोगों को वहाँ रोके रखा गया था.

सरकार का कहना था कि वह सुनिश्चित करना चाहती है कि इन लोगों में एलटीटीई के लोग न हों और दूसरा इस बीच सरकार देश के उत्तरी हिस्से में उन इलाक़ों से बारुदी सुरंग आदि हटाना चाहती थी जहाँ एलटीटीई का गढ़ था.

इन शिविरों को सेना ने कंटीले तारों से घेर रखा था.

बहुत से लोगों ने शिविरों में साफ़ सफ़ाई की ख़राब व्यवस्था और भोजन की ठीक व्यवस्था न होने की शिकायतें की थीं.

इस बात की भी जांच की मांग उठने लगी थी कि क्या श्रीलंका के सैनिकों ने निहत्थे तमिलों की हत्या करके अंतरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन किया है.

एक प्रवासी श्रीलंकाई संगठन ने ये आरोप लगाए थे और एक वीडियो भी जारी किया था.

यह रिकार्डिंग कथित रूप से तमिल टाइगरों के साथ हुई लड़ाई के अंतिम चरण में जनवरी में की गई थी.

इस वीडियो में सेना की वर्दी पहने एक आदमी एक नग्न आदमी के सिर में गोली मारता दिखाया गया है. वीडियो में आठ अन्य शव ज़मीन पर पड़े दिखाए गए हैं.

इस वीडियो की प्रामाणिकता की जांच करना असंभव है. श्रीलंका सरकार का कहना है कि यह वीडियो फ़र्ज़ी है.

फ़ोन्सेका की चुनौती

तमिल विद्रोहियों के ख़िलाफ़ श्रीलंकाई सेना का नेतृत्व करने वाले जनरल सरथ फ़ोन्सेका ने अपना पद छोड़ दिया.

Image caption जनरल फ़ोन्सेका की राष्ट्रपति राजपक्षे से खटक गई थी

अब वो चुनावों में राष्ट्रपति महिदा राजपक्षे को चुनौती दे रहे हैं.

हाल में जनरल फ़ोनसेका ने देश के रक्षा मंत्री को युद्धापराधों का दोषी ठहराया था, हालांकि बाद में वो अपने बयान से पलट गए थे.

एक अख़बार को दिए इंटरव्यू में जनरल फ़ोनसेका ने कहा कि जब तमिल विद्रोहियों के ख़िलाफ़ संघर्ष समाप्ति पर था तो रक्षा मंत्री गोतभ्या राजपक्षे ने आदेश दिया था कि सभी तमिल विद्रोही नेताओं को मार दिया जाए और उन्हें आत्मसमर्पण न करने दिया जाए.

तमिल छापामारों के ख़िलाफ़ जब अभियान चलाया जा रहा था, उस दौरान जनरल फ़ोनसेका श्रीलंका के सेनाध्यक्ष थे.

लेकिन बाद में उनकी रक्षा मंत्री और उनके भाई और राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे से खटपट हो गई थी.

जनरल फ़ोनसेका ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था और एक पत्र लिखकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे.

फ़ोनसेका ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में शिकायत की थी कि एलटीटीई पर जीत के बाद उनके अधिकार छीन लिए गए थे.

उन्होंने अपने पत्र में यह भी लिखा था कि लगता है राष्ट्रपति उन पर भरोसा नहीं करते.

उन्होंने आरोप लगाया था कि सरकार को लगातार ये शक था कि सेना उसका तख़्तापलट करने जा रही है.

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