'किन्नरों को जायदाद में हिस्सा मिले'

  • 24 दिसंबर 2009
हिजड़े
Image caption सभी ज़िलों को आदेश दिया गया है कि किन्नरों को जायदाद में हिस्सा दिया जाए

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि किन्नरों को उनकी ख़ानदानी चल और अचल संपत्ति में से मुनासिब हिस्सा दिलवाने के लिए क़दम उठाए जाएं.

कोर्ट ने ये आदेश देश के सभी ज़िलों के संपर्क अधिकारियों को दिया है.

मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी ने ये आदेश किन्नरों के अधिकारों से संबंधित स्वत: संज्ञान की सुनवाई के दौरान दिया.

मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है.

मुख्य न्यायाधीश ने देश के चारों राज्यों के समाज कल्याण के सचिवों को हिदायत दी कि वो ज़िले के संपर्क अधिकारीयों से कहें कि किन्नरों के ख़ानदानों का पता लगाकर उनके जायदाद में हिस्सा दिलवाने के लिए व्यवहारिक क़दम उठाए जाएं.

कोर्ट का कहना था कि चूँकि किन्नरों के पंजीकरण का काम पूरा हो चुका है, इसलिए उनके ख़ानदानों का पता लगाना आसान है.

'लिंग तय हों'

मुख्य न्यायाधीश ने राष्ट्रीय डाटाबेस पंजीकरण प्राधिकरण (एनडीआरए) के अधिकारियों से कहा कि वो किन्नरों के लिंग को तय करने के लिए कोई स्पष्ट नीति तैयार करके इसकी जानकारी अदालत को दें.

कार्यवाहक अटर्नी जनरल शाह ख़ावर ने अदालत को बताया कि सरकार ने किन्नरों के कल्याण के लिए एक आयोग का गठन किया है जिसमें सभी राज्यों के कल्याण सचिव और दूसरे अधिकारी शामिल हैं.

मुख्य न्यायाधीश ने कहा है कि अगर किन्नर पढ़ने की उम्र में हो तो उनके पढ़ने का भी इंतज़ाम किया जाए साथ ही उन्हें व्यवसायिक प्रशिक्षण भी दिए जाएं.

अदालत का कहना था कि किन्नर भी शारीरिक रुप से अक्षम लोगों की श्रेणी में आते हैं और उनके साथ नफ़रत के बजाए हमदर्दी से पेश आना चाहिए.

ग़ौरतलब है कि इससे पहले अदालत ने सरकार से कहा था कि वो किन्नरों को शारीरिक रुप से अक्षम की श्रेणी में सरकारी नौकरियाँ दी जाएं.

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