छह अंतरराष्ट्रीय सैनिकों की मौत

  • 12 जनवरी 2010
अफ़ग़ानिस्तान में विदेशी सैनिक
Image caption अफ़ग़ानिस्तान में विदेशी सैनिक

अफ़ग़ानिस्तान में नैटो अधिकारियों ने कहा है कि विभिन्न इलाक़ों में छह अंतरराष्ट्रीय सैनिक मारे गए हैं जिनमें तीन अमरीकी और एक फ्रांसीसी भी हैं.

पिछले दो महीने के दौरान अफ़ग़ानिस्तान में अंतरराष्ट्रीय सैनिकों के लिए यह सबसे बड़ा नुक़सान है.

अमरीकी सैन्य प्रवक्ता कर्नल वेन शैंक्स का कहना था कि दक्षिणी इलाक़े में चरमपंथियों के साथ लड़ाई के दौरान अमरीकी सैनिकों की मौत हुई है.

फ्रांसीसी अधिकारियों ने बताया है कि उनका एक सैनिक उस समय मारा गया जब उनके सैनिक अफ़ग़ान सैनिकों के साथ अलासे इलाक़े में गश्त लगा रहे थे. एक सैनिक घायल भी बताया गया है. अलासे घाटी को चरमपंथियों के क़ब्ज़े वाला इलाक़ा कहा जाता है.

बयान

फ्रांस के राष्ट्रपति निकोला सार्कोज़ी के दफ़्तर से जारी एक वक्तव्य में कहा गया है, "अफ़ग़ानिस्तान के लोगों की शांति के लिए फ्रांस के संकल्प की क़ीमत के लिए एक और सैनिक ने अपनी जान गँवाई है. एक सैनिक बहादुरी के साथ ज़ख़्मी भी हुआ है."

नैटो ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय सेना का एक सैनिक पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान में और एक अन्य दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान में मारे गए हैं. लेकिन उनकी पहचान और राष्ट्रीयता के बारे में कोई ब्यौरा नहीं दिया गया है.

बीबीसी संवाददाता मार्क डमेट का कहना है कि इन ताज़ा मौतों से वर्ष 2010 में मारे गए विदेशी सैनिकों की संख्या 15 हो गई है.

इससे संकेत मिलते हैं कि वर्ष 2010 भी पिछले वर्ष जैसा ही हिंसक रह सकता है जो अंतरराष्ट्रीय सेनाओं के लिए सबसे ज़्यादा नुक़सान वाला रहा है.

बीबीसी संवाददाता के अनुसार अंतरराष्ट्रीय सेनाओं को ज़्यादा नुक़सान इसलिए हो रहा है क्योंकि तालेबान चरमपंथियों ने अपनी युद्ध रणनीति बदल दी है और अब ज़्यादा शक्तिशाली बमों का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन साथ ही विदेशी सैनिकों की तैनाती भी बढ़ रही है.

घोषणा

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने दिसंबर में ही ऐलान किया था कि 30 हज़ार अतिरिक्त अमरीकी सैनिक अफ़ग़ानिस्तान भेजे जा रहे हैं.

इन 30 हज़ार सैनिकों की तैनाती के साथ ही अफ़ग़ानिस्तान में कुल अमरीकी सैनिकों की संख्या एक लाख तक पहुँच जाएगी.

अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी कमांडर जनरल स्टैनली मैक्रिस्टल ने हाल ही में अमरीकी टेलीविज़न को दिए इंटरव्यू में कहा था कि सैनिकों की संख्या बढ़ाने के साथ अपेक्षित लक्ष्य हासिल हो रहे हैं और हवा तालेबान के ख़िलाफ़ चलने लगी है.

तालेबान की गतिविधियाँ मुख्य तौर पर दक्षिणी और पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान में केंद्रित हैं लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि अब ये गतिविधियाँ पूर्वी और पश्चिमी अफ़ग़ानिस्तान की तरफ़ भी बढ़ने लगी हैं जहाँ अभी तक आमतौर पर शांति रही है.

संबंधित समाचार