श्रीलंकाई पत्रकार को मिली ज़मानत

श्रीलंका में जिस पत्रकार को पिछले साल 20 साल की जेल की सज़ा सुनाई गई थी उन्हें ज़मानत पर रिहा किया जाएगा. ये जानकारी पत्रकार जीएस थिसेनयगम के वकील ने दी.

थिसेनयगम को 2008 में गिरफ़्तार किया गया था और उन पर अपनी पत्रिका में लेख के ज़रिए हिंसा भड़काने का आरोप था.

इसके अलावा ये आरोप भी लगाया गया था कि उन्हें तमिल विद्रोहियों से पैसा मिलता है. जीएस थिसेनयगम इन आरोपों से इनकार करते हैं.

उनके वकील ने बताया है कि कोर्ट ने आदेश दिया है कि थिसेनयगम अपना पासपोर्ट जमा कर दें और ज़मानत के लिए 500 डॉलर दें. माना जा रहा है कि उन्हें मंगलवार को रिहा किया जाएगा.

2008 में उनकी गिरफ़्तारी का मामला श्रीलंका में सुर्खियों में रहा था और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार गुट रिहाई की माँग करते रहे हैं.

संवाददाताओं का कहना है कि पिछले कुछ सालों में श्रीलंका में किसी भी पत्रकार को दी जाने वाली ये सबसे कड़ी सज़ा थी.

मई में अपने भाषण में अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने जिन चंद पत्रकारों का ज़िक्र किया था उनमें जीएस थिसेनयगम का नाम भी शामिल था. ओबामा ने कहा था कि थिसेनयगम जैसे लोग ऐसे पत्रकारों की मिसाल हैं जिन्हें अपने काम के लिए जेल जाना पड़ा.

श्रीलंका सरकार का कहना है कि ओबामा को ग़लत जानकारी दी गई है.

पिछले सितंबर जीएस थिसेनयगम को रिपोरर्टस विदाउट बॉर्डर्स गुट ने उन्हें पत्रकारिता में बहादुरी और नैतिक मूल्यों का पालन करने के लिए पुरस्कार भी दिया था.

कई वर्षों से चले आ रहे युद्ध को ख़त्म करते हुए मई 2008 में श्रीलंका ने तमिल विद्रोहियों का सफ़ाया कर दिया था.

एक अनुमान के मुताबिक 26 साल चले इस संघर्ष में 70 हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए थे.

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