'पिछला साल अफ़ग़ान लोगों के लिए सबसे बुरा'

  • 13 जनवरी 2010
काबुल में आम नागरिकों की मौत पर प्रदर्शन

संयुक्त राष्ट्र ने अफ़ग़ानिस्तान में हिंसा पर जारी एक रिपोर्ट में कहा है कि पिछले साल वहाँ मारे गए आम नागरिकों की संख्या वर्ष 2001 से लेकर अब तक सबसे अधिक है. वर्ष 2008 के मुकाबले में पिछले साल लगभग 14 प्रतिशत अधिक आम नागरिक मारे गए.

अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान के ख़िलाफ़ अमरीका और उसके सहयोगियों ने वर्ष 2001 में जंग शुरु की थी.

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल अफ़ग़ानिस्तान में 2412 लोग मारे गए जबकि वर्ष 2008 में ये संख्या 2118 थी. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार अधिकतर लोग तालेबान के किए गए हमलों में मारे गए.

उधर अमरीका के नेतृत्व वाली नैटो सेनाओं के हमलों के कारण मारे गए आम लोगों की संख्या में एक-तिहाई की कमी आई है.

'आम नागरिकों को ख़तरा'

पिछले कुछ महीनों में अमरीकी सेनाओं ने बार-बार अफ़ग़ान सरकार को आश्वासन दिया है कि आम नागरिकों का समर्थन पाने के मक़सद से कार्रवाई के दौरान आम नागरिकों के मारे जाने में कमी लाई जाएगी.

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया है, "मारे गए आम नागरिकों की संख्या में आई कमी ये दर्शाती है कि अंतरराष्ट्रीय सेनाएँ इस ओर क़दम उठा रही हैं जिससे आम नागरिकों को ख़तरा कम किया जाए."

पर्यवेक्षकों का मानना है कि अब चिंता जताई जा रही है कि जब देश में स्थिरता कायम करने के लिए 37 हज़ार अतिरिक्त सैनिकों को तैनात किया जाता है तो और आम नागरिक मारे जा सकते हैं.

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि अफ़ग़ानिस्तान में वर्ष 2008 में 295 के मुकाबले में वर्ष 2009 में 520 सैनिक मारे गए.

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