हिंसा के बीच चुनाव प्रचार ख़त्म

महिंदा राजपक्षे
Image caption महिंदा राजपक्षे चुनाव मैदान में हैं

श्रीलंका में मंगलवार को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिए प्रचार अभियान शनिवार शाम ख़त्म हो गया.

चुनाव प्रचार के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा हुई जिसमें चार लोग मारे भी गए. इस चुनाव में सत्ताधारी श्रीलंका फ़्रीडम पार्टी के महिंदा राजपक्षे और विपक्षी न्यू डेमोक्रेटिक फ़्रंट समेत कुल 22 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं.

पिछले 37 सालों में ये पहला मौक़ा है जब राष्ट्रपति चुनाव में एलटीटीई की ओर से क़ानून और व्यवस्था संबंधी कोई चुनौती नहीं है.

पिछले साल श्रीलंका की सेना ने तमिल विद्रोहियों के ख़ात्मे का दावा दिया था और सैन्य अभियान में एलटीटीई के प्रमुख प्रभाकरन मारे गए थे.

पूर्व जनरल की चुनौती

श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों के ख़िलाफ़ अभियान की कमान संभालने वाले पूर्व सेना प्रमुख जनरल सरथ फ़ोनसेका भी राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के ख़िलाफ़ चुनाव मैदान में हैं.

दोनों ही उम्मीदवारों ने अपने चुनाव प्रचार में तमिल विद्रोहियों की समस्या का अंत करने का श्रेय लेने की ज़ोरदार कोशिश की.

चुनाव अभियान के दौरान हुई भारी हिंसा के लिए जनरल फ़ोनसेका ने राजपक्षे की पार्टी को ज़िम्मेदार ठहराया.

फ़ोनसेका ने आरोप लगाते हुए कहा, "चुनावी हिंसा से मतदाता भयभीत हो गए हैं और इसका असर मतदान प्रतिशत पर होगा क्योंकि कम लोग मतदान केंद्र पर आएँगे. ऐसे में सत्ताधारी पार्टी को चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने का मौक़ा मिल जाएगा. इससे चुनाव के नतीजे प्रभावित हो सकते हैं."

आरोप

जनरल फ़ोनसेका ने ये भी आरोप लगाया कि सत्ताधारी श्रीलंका फ़्रीडम पार्टी ने मंगलवार को होनेवाले चुनाव के दिन भी हिंसा कर लोगों को भयभीत करने की पूरी योजना बना रखी है.

Image caption फोनसेका ने एलटीटीई के ख़िलाफ़ अभियान का नेतृत्व किया था

दूसरी ओर चुनाव प्रक्रिया की निगरानी कर रहे एक पर्यवेक्षक डॉक्टर पैकियासोथी सर्वणमुट्टू ने कहा है कि पिछले चुनावों में हिंसा की जो घटनाएँ होती थीं उसके लिए तमिल विद्रोहियों को ज़िम्मेदार ठहराया जाता था लेकिन इस बार की हिंसा से ये स्पष्ट हो गया है कि चुनाव के दौरान होनेवाली हिंसा दरअसल श्रीलंका की राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा है.

उन्होंने ये भी कहा कि इस चुनाव में अनियमितता होने की भी आशंका है जिसके संकेत ख़ुद चुनाव आयुक्त ने भी दिए हैं.

हालाँकि राजधानी कोलंबो के लोग पहली बार तमिल विद्रोहियों के ख़तरे के बिना हो रहे इस चुनाव को लेकर बेहद उत्साहित हैं और उनका कहना है कि चुनावी धांधली और हिंसा उन्हें अपने मताधिकार का प्रयोग करने नहीं रोक सकती.

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