श्रीलंकाः विपक्ष में हिंसा की आशंका जताई

श्रीलंका में आमजन (फाइल)

श्रीलंका में राष्ट्रपति पद के लिए मंगलवार को होने वाले मतदान से पहले विपक्षी प्रत्याशी ने हिंसा की आशंका जताई है.

विपक्षी प्रत्याशी ने आरोप लगाया है कि सत्तापक्ष मंगलवार के मतदान से पहले हिंसा भड़काकर चुनाव को अपनी ओर मो़ड़ने की कोशिश कर सकता है.

राष्ट्रपति चुनाव में विपक्षी प्रत्याशी जनरल सरथ फोनसेका ने कहा है कि अगर हिंसा भड़कती है तो मतदान के दिन कम लोग वोट डालने पहुँचेंगे और इसका सीधा लाभ राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे को मिलेगा.

इससे पहले शनिवार को चुनाव प्रचार खत्म होने से पहले तक कई इलाकों से प्रचार के दौरान हिंसा की ख़बरें मिली थीं.

हिंसा की अलग-अलग घटनाओं में अबतक चार लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग घायल हो चुके हैं.

हालांकि सत्तापक्ष ने विपक्ष के इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है कि इन हिंसक घटनाओं के पीछे उनकी कोई भूमिका है और कहा है कि चुनाव के लिए सुरक्षा के बंदोबस्त और कड़े किए जाएंगे.

आमने-सामने

मौजूदा राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे और पूर्व सेना प्रमुख सरथ फोनसेका मुख्य उम्मीदवार हैं और दोनों ही जीत का दावा कर रहे हैं.

पिछले साल मई में तमिल विद्रोहियों के ख़िलाफ़ लड़ाई ख़त्म हुई थी और इसको लेकर दोनों के बीच मतभेद पैदा हो गए थे.

राजपक्षे और फोनसेका दोनों ने चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी है. इस दौरान वे तमिल बहुल जाफ़ना भी गए.

संयुक्त राष्ट्र, अमरीका और यूरोपीय संघ ने तमिल विद्रोहियों पर मिली जीत के बाद हो रहे इस पहले चुनाव में शांति बनाए रखने की अपील की है.

सरथ फोनसेका के चुनाव मैदान में उतरने से पहले ये लग रहा था कि महिंदा राजपक्षे के लिए एकतरफ़ा मुक़ाबला होगा लेकिन विश्लेषकों के मुताबिक फोनसेका के मैदान में उतरने और विपक्षी दलों का समर्थन मिलने से राजपक्षे की लोकप्रियता में गिरावट आई है.

तमिल विद्रोहियों के साथ लड़ाई में लगभग तीन लाख तमिल विस्थापित हो गए थे. इनमें से अधिकतर अभी भी अस्थायी कैंपों में रह रहे हैं.

पर्यवेक्षकों ने इनके मताधिकार छिनने की आशंका जताई थी लेकिन चुनाव आयुक्त ने कहा है कि सभी विस्थापित वोट डाल सकते हैं.

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