मुजीब के हत्यारों को फांसी दी गई

  • 28 जनवरी 2010
फांसी की सज़ा
Image caption जिस समय फांसी की सज़ा दी गई उस दौरान ढाका जेल के बाहर भारी भीड़ जमा थी

बांग्लादेश के संस्थापक शेख़ मुजीबुर्रहमान की हत्या के मामले में पाँच पूर्व सैन्य अधिकारियों को फांसी दे दी गई है.

इन पाँचों को ढाका के केंद्रीय कारागार में मौत की सज़ा दी गई.

जिन लोगों को फांसी दी गई, वे हैं मेजर बज़लुल हूदा, लेफ़्टिनेंट कर्नल मोहीउद्दीन अहमद, लेफ़्टिनेंट कर्नल सैयद फ़ारूक रहमान, लेफ़्टिनेंट कर्नल सुल्तान शहरयार राशिद ख़ान और सेना नायक एकेएम मोहीउद्दीन.

आधी रात को जब फांसी दी गई तो ढाका जेल के बाहर लगभग एक हज़ार लोग मौजूद थे.

इसमें प्रधानमंत्री शेख़ हसीना की पार्टी अवामी लीग के समर्थक भी शामिल थे जो 'आख़िरकार न्याय मिला' जैसे बैनर लिए हुए थे.

जेल की सुरक्षाबलों ने घेराबंदी कर दी थी और रेपिड एक्शन बटालियन तैनात कर दी गई थी.

विवादास्पद मुक़दमा

बुधवार को ही बांग्लादेश के सर्वोच्च न्यायालय ने देश के प्रथम राष्ट्रपति शेख़ मुजीबुर्रहमान की हत्या के मामले में इन सैन्य अधिकारियों को मौत की सज़ा सुनाए जाने की पुष्टि की थी.

उन्हें पहले ही मौत की सज़ा सुनाई जा चुकी थी और इस सज़ा के ख़िलाफ़ ये उनकी आख़िरी अपील थी.

ये बांग्लादेश में लंबे समय से चला सबसे विवादास्पद मुक़दमा रहा है.

इस मामले की सुनवाई दस वर्ष पहले शुरु हुई थी.

बांग्लादेश के पहले राष्ट्रपति शेख़ मुजीबुर्रहमान की उनके परिवार के ज़्यादातर सदस्यों के साथ 1975 में हत्या कर दी गई थी.

मुजीबुर्रहमान बंग बंधु के नाम से भी जाने जाते हैं.

वर्ष 1971 में बांग्लादेश की स्वतंत्रता में उन्होंने प्रमुख भूमिका निभाई थी.

वर्ष 1975 में सैन्य तख्त पलट में उन्हें, उनकी पत्नी और तीन बेटों को घर में गोली मार कर हत्या कर दी गई थी.

इस हमले में शेख़ मुजीब के अन्य परिवारजन सहित 20 लोग मारे गए थे.

शेख़ मुजीबुर्रहमान की बेटी और इस समय बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना और उनकी छोटी बहन रेहाना इसलिए बच गई थीं क्योंकि वे उस समय विदेश में थीं.

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