सभी मुद्दों पर चर्चा संभव: पाक उच्चायुक्त

भारत और पाकिस्तान के झंडे
Image caption मुंबई हमलों के बाद से भारत-पाक वार्ता पर विराम लगा हुआ है

भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त शाहिद मलिक ने कहा है कि दोनों देशों के बीच सचिव स्तर की बातचीत में भारत और पाकिस्तान से संबंधित सभी संभव मुद्दों पर बातचीत हो सकती है.

उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान कश्मीर का मुद्दा दोनों पक्षों के बीच हर बातचीत में उठाता आया है और आगे भी उठाएगा.

पाकिस्तानी उच्चायुक्त ने ये विचार शुक्रवार को दिल्ली में भारतीय विदेश सचिव निरुपमा राव के साथ बातचीत के बाद मीडिया के साथ समक्ष व्यक्त किए.

ग़ौरतलब है कि दोनों देशों के बीच वर्ष 2004 में शुरु हुई समग्र वार्ता का सिलसिला नवंबर 2008 में हुए मुंबई हमलों के बाद से रुका हुआ है.

भारत बार-बार कहता रहा है कि पाकिस्तान अपनी धरती पर मौजूद उन कथित चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करे जिनपर मुंबई हमलों से संबंधित होने का आरोप है. उधर पाकिस्तान कहता रहा है कि वह हर संभव कार्रवाई कर रहा है और यदि भारत पुख़्ता सबूत सौंपे तो कार्रवाई बेहतर ढंग से हो सकती है.

अमरीका ने दोनों देशों के बीच इस क़दम का स्वागत किया है. अमरीकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता पीजे क्रॉली ने पत्रकारों को बताया, "हम उन क़दमों को प्रोत्साहन देते आए हैं जिनसे भारत-पाकिस्तान अपने मुद्दों का समाधान कर सकें और उचित क़दम उठा सकें ताकि तनाव घट सके और सहयोग बढ़ सके. इससे क्षेत्र में अधिक स्थिरता आएगी क्योंकि दोनों समान ख़तरों का सामना कर रहे हैं."

'आतंकवाद पर भी बात'

समाचार एजेंसियों के अनुसार शाहिद मलिक का कहना था, "वार्ता ही आगे बढ़ने का एक रास्ता है....मैं तफ़सील में नहीं जा रहा. भारत और और पाकिस्तान से संबंधित हर संभव मुद्दे पर बातचीत हो सकती है....कश्मीर ऐसा मुद्दा है जिसे हम भारत के साथ हर संभव अवसर और फ़ोरम पर उठाते रहे हैं...आगे भी उठाएँगे."

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "आतंकवाद भी निश्चित तौर पर चर्चा का मुद्दा होगा क्योंकि पाकिस्तान आतंकवाद से प्रभावित है...हम इस मुद्दे से बचने की कोई कोशिश नहीं करेंगे."

सचिव स्तर की बातचीत की तिथियों के बारे में शाहिद मलिक का कहना था कि वे अपने देश के विदेश मंत्रालय और पाकिस्तान की सरकार को उनकी इस बातचीत के बारे में अवगत कराएँगे और दोनों पक्षों को स्वीकार्य तिथि और समय के बारे में विचार करेंगे.

महत्वपूर्ण है कि भारत पहले ही घोषणा कर चुका है कि भारतीय गृहमंत्री पी चिदंबरम रावलपिंडी में भविष्य में होने वाली क्षेत्रीय बैठक में भाग लेंगे.

'कश्मीरी भी हिस्सा बनें'

उधर समाचार एजेंसियों के अनुसार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने पाकिस्तान में कहा, "हम चाहते हैं कि कश्मीरी भी भारत-पाकिस्तान समग्र वार्ता की प्रक्रिया का हिस्सा हों. कश्मीरियों को इसका सबसे अधिक फ़ायदा होना चाहिए."

इससे पहले भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी हुर्रियत कॉन्फ़ेंस के उदारवादी गुट के नेता मौलान मोहम्मद अब्बास अंसारी पहले ही भारत-पाकिस्तान के बीच इस बातचीत का स्वागत कर चुके हैं और उनका कहना है कि आगे चल कर कश्मीरियों को भी इसका हिस्सा बनना चाहिए.

दूसरी ओर हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस के कट्टरपंथी गुट के नेता सईद अली शाह गिलानी कहते आए हैं कि द्विपक्षीय बातचीत से कुछ हासिल नहीं हुआ है और जब भी बातचीत हो ये त्रिपक्षीय होनी चाहिए.

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