अहम बैठक में पाकिस्तान तय करेगा जवाब

Image caption बैठक की अध्यक्षता विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी करेंगे.

भारत की तरफ़ से बातचीत के न्यौते के जवाब की रूपरेखा तय करने के लिए पाकिस्तान में बुधवार को एक उच्चस्तरीय बैठक होने जा रही है.

भारत की तरफ़ से आए न्यौते ने पाकिस्तान के सामने असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है क्योंकि पाकिस्तान समग्र वार्ता के लिए दबाव बनाता रहा है जबकि ये न्यौता केवल आंतकवाद के मामले पर बातचीत के लिए है.

बुधवार को पाकिस्तान में होनेवाली इस बातचीत की अध्यक्षता वहां के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी करेंगे और इस बैठक के बाद ही पाकिस्तान के रूख़ का सही अंदाज़ा लग पाएगा.

इस बैठक में पाकिस्तानी गृह और रक्षा मंत्रालय के प्रतिनिधियों समेत वहां की ख़ुफ़िया एजेंसियां भी शामिल होंगी.

पाकिस्तानी मीडिया में छप रही ख़बरों के अनुसार भारत के इस न्योते ने पाकिस्तान के लिए 'कूटनीतिक असमंजस' की स्थिति पैदा कर दी है.

पाकिस्तान के डॉन अख़बार का कहना है कि पाकिस्तान अगर न्यौता स्वीकार करता है तो वो एक तरह से समग्र वार्ता को नकारने को तैयार दिखता है और यदि वो इसे ठुकराता है तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने उसकी छवि एक अवरोधक की बनती है और यही वजह है कि पाकिस्तान इसका जवाब तलाशने में काफ़ी सावधानी बरत रहा है.

समग्र वार्ता

मुंबई हमलों से पहले भारत पाकिस्तान के बीच चल रही समग्र वार्ता में आठ विषयों पर बातचीत चल रही थी और इसमें कश्मीर का मामला भी शामिल था.

इस बार के विदेश सचिव स्तर की बातचीत के न्यौते में भारत ने साफ़ कर दिया है कि ये समग्र वार्ता नहीं है बल्कि आतंकवाद के मामले पर बातचीत होनी है.

Image caption भारतीय विदेश सचिव निरूपमा राव की तरफ़ से ये प्रस्ताव पाकिस्तान के सामने रखा गया है.

भारत ने ये भी कहा है कि वो बलोचिस्तान के मामले पर भी बातचीत को तैयार है क्योंकि वो इसे एक “परिपक्व” तरीके से हल करने के हक में है.

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल बसित ने कहा है कि जब दोनों देशों के बीच समग्र वार्ता चल ही रही थी तो उसे शुरू करने के बजाए फिर से एक नई प्रक्रिया शुरू करने की कोई ज़रूरत नहीं है.

विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान ये नहीं दिखाना चाहता कि वो किसी दबाव के तहत बातचीत की प्रक्रिया में शामिल हो रहा है.

माना जा रहा है कि यही वजह है कि पिछले एक दो दिनों में विदेश मंत्री शाह महमूद कुरेशी ने कूटनीतिक भाषा की जगह पाकिस्तानी जनता के सामने एक आक्रामक रूख दिखाने की कोशिश की है.

आमतौर पर दोनों ही देशों के राजनयिक किसी बातचीत से पहले इस तरह का रूख़ अपनाने से बचते रहे हैं.

भारत ने बातचीत के लिए 18 और 25 फ़रवरी की ताऱीख़ पाकिस्तान के सामने रखी है.

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