कौन हैं मुल्ला अब्दुल बिरादर?

मुल्ला उमर
Image caption तालेबान के नेता मुल्ला उमर की तस्वीर, मगर मुल्ला बिरादर की कोई तस्वीर नहीं है

अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि तालेबान के मुख्य सैन्य कमांडर मुल्ला अब्दुल ग़नी बिरादर को गिरफ़्तार कर लिया गया है.

उन्हें तालेबान का नंबर दो नेता माना जाता है.

मुल्ला अब्दुल ग़नी बिरादर की गिनती उन चार लोगों में होती है जिन्होंने 1994 में तालेबान की शुरूआत की थी.

संगठन में वे तालेबान के सबसे बड़े नेता मुल्ला मोहम्मद उमर के बाद दूसरे नंबर के नेता रहे हैं. मुल्ला उमर को 11 सितंबर के हमलों के बाद कभी नहीं देखा गया है.

वरिष्ठ पाकिस्तानी पत्रकार रहीमुल्ला यूसुफ़ज़ई बताते हैं कि मुल्ला उमर अपने संदेश मुल्ला बिरादर के माध्यम से ही संगठन के भीतर पहुँचाते रहे हैं और तालेबान की रोज़ाना की गतिविधियाँ मुल्ला बिरादर तालेबान के निर्देश पर चला करती रही हैं.

तालेबान के लिए मुल्ला बिरादर का महत्व बताते हुए रहीमुल्ला कहते हैं, “मुल्ला बिरादर का पकड़ा जाना तालेबान के लिए बहुत बड़ा आघात हो सकता है क्योंकि वे उनकी जगह पर किसी दूसरे नेता को तो नियुक्त कर सकते हैं, लेकिन नए नेता का क़द उनके बराबर नहीं हो सकता.”

व्यक्तिगत जानकारी

मुल्ला बिरादर तालेबान के महत्वपूर्ण नेता रहे हैं लेकिन उनके बारे में व्यक्तिगत जानकारियाँ बहुत कम उपलब्ध हैं.

वैसे अंतरराष्ट्रीय पुलिस संस्था इंटरपोल के अनुसार मुल्ला बिरादर का जन्म 1968 में अफ़ग़ानिस्तान के उरूज़गान प्रांत में, देहरावुद ज़िले के एक गाँव वीतमाक में हुआ था.

संस्था के अनुसार मुल्ला बिरादर अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान की सत्ता के के दौरान उनके रक्षा उपमंत्री भी रहे थे.

रहीमुल्ला यूसुफ़ज़ई बताते हैं कि मुल्ला बिरादर ने ना तो मीडिया को कोई इंटरव्यू दिया ना ही उन्होंने कोई तस्वीर ख़िंचवाई क्योंकि वे इसे इस्लाम के विरूद्ध समझते हैं.

रहीमुल्ला बताते हैं कि इसका उन्हें फ़ायदा भी हुआ क्योंकि तस्वीर नहीं होने के कारण ही वे इतने लंबे अर्से तक ना तो पकड़ में आए ना ही उन्हें मारा जा सका.

बातचीत के पक्षधर

मुल्ला बिरादर के बारे में कहा जाता है कि वे तालेबान के प्रभावशाली नेता होने के बावजूद ऐसे नेताओं में से रहे हैं जो अमरीका और अफ़ग़ानिस्तान सरकार के साथ बातचीत के पक्षधर रहे हैं.

वैसे रहीमुल्ला युसूफ़ज़ई इस बारे मे कहते हैं,"तालेबान के भीतर ऐसा नहीं होता कि एक कमांडर के कहने से सारे तालिबान मान जाएँ. तालेबान में एक शूरा नाम की 10-12 सदस्यों की एक समिति होती है और वही फ़ैसले लेती है."

मुल्ला बिरादर के बारे में ये भी बात कही जाती है कि उनके पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के साथ क़रीबी संबंध रहे हैं.

रहीमुल्ला का कहना है कि इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है और ना केवल मुल्ला बिरादर बल्कि दूसरे तालेबान नेताओं के भी आईएसआई से संबंध हो सकते हैं.

रहीमुल्ला कहते हैं,"आईएसआई ही क्यों, तालेबान के संबंध अरब के दूसरे देशों से भी हो सकते हैं, क्योंकि उन्हें पैसे मिलते हैं, हथियार मिलते हैं, वरना वे लड़ कैसे रहे होते."

मुल्ला बिरादर के बारे में एक ख़बर पिछले साल जुलाई में मिली थी कि उन्होंने अमरीकी पत्रिका न्यूज़वीक से ई-मेल पर संपर्क किया था जिसमें उन्होंने कहा, कि मुल्ला उमर का स्वास्थ्य अच्छा है और ये बात बिल्कुल ग़लत है कि तालेबान के नेता पाकिस्तान में छिपे हुए हैं.

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