भारत से सहयोग नहीं मिल रहा है: गिलानी

युसूफ़ रज़ा गिलानी
Image caption गिलानी ने आंतकवाद को भारत-पाकिस्तान का साझा दुश्मन बताया है

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने कहा है कि पाकिस्तान शांति के लिए वचनबद्ध है लेकिन भारत से कोई प्रोत्साहन नहीं मिल रहा है.

अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के लिए अमरीका के विशेष दूत रिचर्ड हॉलब्रुक से मुलाक़ात के दौरान प्रधानमंत्री ने भारत के रैवय से उनको अवगत कराया.

उन्होंने बताया,''पाकिस्तान इस क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए वचनबद्ध है और मेरी सरकार भारत के साथ समग्र वार्ता फिर से शुरु करने की कोशिश कर रही है.''

भारत का रवैया

उन्होंने आगे कहा, ''मुझे इस बात पर खेद है हमारे इन प्रयासों को भारत प्रोत्साहित नहीं कर रहा है और उस का रवैया भी सही नहीं है.''

यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने कहा,''आंतकवादियों की गतिविधियों से भारत और पाकिस्तान के संबंध बंधक नहीं बनने चाहिए क्योंकि आंतकवाद दोनों देशों का साझा दुश्मन है.''

ग़ौरतलब है कि अमेरिकी विशेष दूत रिचर्ड हॉलब्रुक गुरुवार को पाकिस्तान पहुँचे थे और उन्होंने प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी से मुलाक़ात की थी.

वे काबुल से इस्लामाबाद पहुँचे थे. उन्होंने प्रधानमंत्री को अफ़ग़ानिस्तान की स्थिति की जानकारी दी.

उन्होंने प्रधानमंत्री को कहा कि उनकी सरकार पाकिस्तान के भीतर और बाहर चरमपंथियों को जड़ से उखाड़ फेंकने में पाकिस्तान की पूरी मदद करना चाहती है.

उन्होंने कहा कि अमरीकी नागरिकों को पाकिस्तानी वीज़ा की समस्या दूर हो गई है और अब वे पाकिस्तान को तुंरत सहायता देने का वादा करते हैं.

प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने उनसे कहा कि इस बात का ख़्याल रखा जाए कि अफ़ग़ानिस्तान में चरमपंथियों के ख़िलाफ़ हो रहे साझा अभियान से चरमपंथी पाकिस्तान न आ जाएँ.

अफ़ग़ानिस्तान में अभियान

उन्होंने अमरीका पर बल दिया कि इसको लेकर पाकिस्तानी सेना के साथ व्यापक स्तर पर सहयोग होना चाहिए.

रिचर्ड हॉलब्रुक राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी, सेनाध्यक्ष जनरल अशफाक़ परवेज़ कियानी और विपक्षी पार्टी के प्रमुख नवाज़ शरीफ़ से भी मुलाक़ात करेंगे.

इससे पहले बीबीसी से हुई बातचीत में हॉलब्रुक ने कहा था कि ईरान और भारत के साथ-साथ क्षेत्र में पाकिस्तान की भी सुरक्षा चिंताएँ हैं.

उनका कहना था कि अफ़ग़ानिस्तान सरकार ख़ुद भी मानती है पाकिस्तान को इस प्रक्रिया में शामिल किए बिना वहाँ शांति संभव नहीं है.

दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान के ख़िलाफ़ चल रहे बड़े सैन्य अभियान 'ऑपरेशन मोशतरक' के विषय में उन्होंने कहा कि वह ठीक चल रहा है लेकिन अभी भी प्रारंभिक चरणों में है.

उन्होंने कहा कि यह अपने क़िस्म का कोई आख़िरी अभियान भी नहीं है.

रिचर्ड हॉलब्रुक ने कहा कि एक बार तालेबान का सफ़ाया हो जाए तो इसके बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय सुरक्षा बलों को प्रशिक्षण और नागरिक सुविधाएँ देना जारी रख सकेगा.

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