राजपक्षे की अल्पसंख्यक नेताओं से अपील

  • 21 फरवरी 2010
महिंदा राजपक्षे

श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने अल्पसंख्य तमिल और मुस्लिम नेताओं से अपील की है कि वे जातीय संघर्ष के राजनीतिक समाधान के लिए उनसे बात करें.

भारतीय समाचारपत्र द हिंदू से बातचीत में राजपक्षे ने कहा कि अब जबकि एलटीटीई विद्रोहियों को सैन्य तरीक़े से हरा दिया गया है, बातचीत ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है.

पिछले महीने ही राजपक्षे एक बार फिर श्रीलंका के राष्ट्रपति निर्वाचित हुए हैं.

राष्ट्रपति चुने जाने के बाद पहली बार जातीय मुद्दे पर विस्तृत रूप से अपनी टिप्पणी में राजपक्षे ने कहा कि अप्रैल में संसदीय चुनाव के बाद वे सभी जातीय संगठनों से बातचीत शुरू करेंगे.

उन्होंने कहा कि अगर ये राजनेता बातचीत नहीं करेंगे, तो वे नए और उभरते हुए नेताओं से बातचीत करेंगे.

कोलंबो से बीबीसी संवाददाता अनबरासन इथिराजन का कहना है कि इस इंटरव्यू में राष्ट्रपति राजपक्षे भरोसेमंद के साथ-साथ दृढ़निश्चयी भी प्रतीत हो रहे थे.

विकल्प

उन्होंने कहा कि अल्पसंख्य तमिल और मुस्लिम नेता जातीय संघर्ष के समाधान के लिए उस समय तक बातचीत को लेकर उत्सुक नहीं थे जब तक प्रभाकरण ज़िंदा थे.

Image caption फ़ोनसेका इस समय हिरासत में हैं

राष्ट्रपति राजपक्षे ने कहा कि अब स्थितियाँ बदल गई हैं और तमिल और मुस्लिम नेताओं को ये समझना चाहिए कि उनके पास बातचीत के अलावा कोई विकल्प नहीं है.

पूर्व सेनाध्यक्ष सरथ फ़ोनसेका की गिरफ़्तारी के बारे में उन्होंने आरोप लगाया कि फ़ोनसेका सेना को बाँटने की कोशिश कर रहे थे.

राजपक्षे ने कहा कि फ़ोनसेका वैसी गतिविधियों में शामिल थे, जिस कारण सैन्य क़ानून के तहत उन पर मुक़दमा चलाया जा सकता है.

उन्होंने दावा किया कि सैनिक हिरासत में होने के बावजूद फ़ोनसेका को फ़ाइव स्टार सुविधाएँ मिल रही हैं. फ़ोनसेका पर सरकार के तख़्तापलट की कोशिश का आरोप है. हालाँकि वे इससे इनकार करते हैं.

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