बांग्लादेश विद्रोह की सुनवाई शुरू

बांग्ला देश राफ़ल्स के जवान
Image caption बांग्ला देश राफ़ल्स के जवानो ने एक साल पहले विद्रोह किया था

बांग्लादेश की राजधानी ढ़ाका में पिछले साल होने वाले सैनिक विद्रोह के आरोपियों के ख़िलाफ़ मुक़दमे की पहली सुनवाई शुरू हो गई है.

बांग्लादेश राइफ़ल्स सीमा बल के इस विद्रोह में 70 से अधिक लोग मारे गए थे जिनमें 57 अधिकारी भी शामिल थे. उनके इस विद्रोह के कारण देश गृह-युद्ध के कगार पर पहुंच गया था.

लगभग एक साल पहले हज़ारों की संख्या में बांग्लादेशी सीमा सुरक्षा सैनिकों ने अपने मुख्यालय पर क़ब्ज़ा कर लिया था. यह मुख्यालय ढाका शहर के बीच में स्थित है.

अपने हथियार डालने से पहले उन्होंने लगभग सभी अफ़सरों को मार डाला. उनका आरोप था कि ये सारे सीनियर अधिकारी भ्रष्ट थे.

उनका यह विद्रोह लगभग 48 घंटे तक जारी रहा.

इस विद्रोह में शामिल होने वाले 80 से अधिक आरोपियों के ख़िलाफ़ मुक़दमा शुरू कर दिया गया है.

यह मुक़दमा उसी कमरे दरबार हॉल में शुरू किया गया है जहां से बग़ावत शुरू हुई थी. दो जवानों ने अपने कमांडिंग अधिकारी को उस समय मारने की कोशिश की थी जब वह वहां भाषण दे रहे थे.

कुल मिला कर तीन से साढ़े तीन हज़ार जवानों की पेशी होनी है जिन पर विद्रोह करने का आरोप है.

बांग्लादेश के एक समाचार पत्र का कहना है कि हत्या, लूटमार, और बलात्कार के आरोपी लगभग 800 जवानों की सुनवाई अलग से जन नागरिक अदालत में होगी.

इस मामले में अभी तक तारीख़ तय नहीं की गई है. कहा जाता है कि यह सुनवाई इस देश के इतिहास में सबसे बड़ी सुनवाई होगी.

विद्रोह

ये विद्रोह बांग्लादेश राइफ़ल्स (बीडीआर) के जवानों ने किया था और बाद में ये विद्रोह ढाका के बाहर 12 अन्य शहरों में फैल गया था.

शुरुआत में कहा गया था कि वेतन, कामकाज का वातावरण और तरक्की के सवालों पर नाराज़ जवानों ने विद्रोह किया था.

उल्लेखनीय है कि शुरुआत में बांग्लादेश सरकार ने विद्रोह करने वालों को आम माफ़ी की पेशकश की थी लेकिन जब मारे गए लोगों की संख्या का असल आँकड़ा सामने आया तो सरकार ने कहा कि दोषियों को सज़ा दी जाएगी.

लेकिन प्रधानमंत्री शेख़ हसीना का कहना है कि ये उनकी सरकार को गिराने की साज़िश का हिस्सा हो सकता है.

बाद में बीडीआर के 40 जवानों से पूछताछ के दौरान ये बात सामने आई है कि जमाअतु-मुजाहिदीन और कुछ जवानों के बीच भी संबंध था.

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