भारत-पाक चर्चा में तीसरा पक्ष नहीं: एंटनी

  • 24 फरवरी 2010
भारत और पाकिस्तान के झंडे
Image caption भारत और पाकिस्तान के विदेश सचिवों की बैठक 25 फ़रवरी को दिल्ली में होगी

भारत और पाकिस्तान के बीच 25 फ़रवरी को होने वाली सचिव स्तर की बातचीत से पहले भारत ने स्पष्ट किया है कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय बातचीत में उसे किसी तीसरे देश का दख़ल स्वीकार्य नहीं है.

समाचार एजेंसियों के अनुसार बीजिंग में पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा था कि यदि चीन भारत-पाकिस्तान के रिश्तें को बेहतर बनाने के लिए कोई भूमिका निभाना चाहता है तो पाकिस्तान इसके लिए तैयार है. उनका ये भी कहना था कि भारत को ये फ़ैसला करना है कि क्या उसे चीन की तीसरे पक्ष की भूमिका स्वीकार्य है या नहीं.

भारत के रक्षा मंत्री एके एंटनी ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि भारत को किसी तीसरे पक्ष का दख़ल स्वीकार्य नहीं है.

एंटनी का कहना था, "भारत की मूल नीति है कि हमें पाकिस्तान के साथ अपने द्विपक्षीय मामलों में किसी भी अन्य देश का दख़ल स्वीकार्य नहीं है. हमें किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता मंज़ूर नहीं है."

उन्होंने दिल्ली में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) की वार्षिक बैठक के दौरान पत्रकारों को बताया कि पेशावर के सिखों के सर कलम करने की हाल की घटना को विदेश सचिव स्तर की बातचीत के दौरान 25 फ़रवरी को उठाया जाएगा.

भारत ये पहले ही कह चुका है कि इस बातचीत में ध्यान पाकिस्तान में मौजूद कथित चरमपंथी संगठनों पर केंद्रित किया जाएगा.

नवंबर 2008 में मुंबई में हुए चरमपंथी हमलों के बाद से भारत-पाकिस्तान समग्र वार्ता पर विराम लगा हुआ है. चाहे भारत ने कहा है कि इस बातचीत को समग्र वार्ता की शुरुआत न माना जाए, लेकिन पर्यवेक्षकों को मानना है कि भारत-पाक रिश्तों में आई ठंडक घटाने में इस बातचीत की अहम भूमिका हो सकती है.

संबंधित समाचार