तालेबान नेताओं के प्रत्यार्पण पर रोक

तालेबान
Image caption याचिकाकर्ता के अनुसार पाँच तालेबान नेताओं को अमरीका को सौंपने की तैयारी की जा रही है

पाकिस्तान में एक हाईकोर्ट ने गिरफ़्तार किए गए तालेबान नेताओं को किसी दूसरे देश को सौंपने पर रोक लगा दी है.

मुसलमानों के अधिकारों के लिए काम करने वाले एक कार्यकर्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत में यह फ़ैसला दिया है.

न्यायाधीश ख़्वाजा मोहम्मद शरीफ़ ने कहा है कि गिरफ़्तार किए गए चरमपंथियों पर किसी मुसलमान की तरह पाकिस्तान में ही मुक़दमा चलाया जाना चाहिए और उन्हें अमरीका जैसे किसी देश को नहीं सौंपा जाना चाहिए.

हाईकोर्ट का फ़ैसला अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई के उस बयान के एक दिन बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान गिरफ़्तार किए गए एक बड़े तालेबान नेता को सौंपने के लिए राज़ी हो गया है.

तालेबान के ख़िलाफ़ संघर्ष में अमरीका के क़रीबी सहयोगी पाकिस्तान ने पिछले कुछ हफ़्तों में कम से कम चार वरिष्ठ तालेबान लड़ाकों को पकड़ा है.

इनमें तालेबान के मुख्य रणनीतिकारों में से एक मुल्ला अब्दुल ग़नी बिरादर भी शामिल है.

नोटिस

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार मुसलमानों के अधिकारों के लिए कार्य करने वाले कार्यकर्ता ख़ालिद ख़्वाजा ने लाहौर हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए चिंता ज़ाहिर की थी कि बिरादर सहित गिरफ़्तार किए गए अन्य तालेबान नेता अमरीका को प्रत्यार्पित कर दिए जाएँगे.

इस याचिका पर सरकारी अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए न्यायाधीश ने कहा कि गिरफ़्तार किए गए तालेबान नेता मुसलमान हैं और उन पर पाकिस्तान में ही मुक़दमा चलाया जाना चाहिए.

हालांकि पाकिस्तान ने अब तक बिरादर की गिरफ़्तारी की पुष्टि की है लेकिन अफ़ग़ानिस्तान ने कहा है कि पाकिस्तान ने तीन और वरिष्ठ तालेबान नेता अब्दुल सलाम, मीर मोहम्मद और अब्दुल कबीर को हाल ही में गिरफ़्तार किया गया है.

याचिका में पाँच तालेबान नेताओं के नाम दिए गए हैं. इन चार नेताओं के अलावा उसमें अमीर मुआविया का भी नाम दिया गया है.

ये गिरफ़्तारियाँ ऐसे समय में हुई हैं जब अमरीकी फ़ौजें अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान के ख़िलाफ़ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई में लगी हुई है.

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