संबंधों पर निशाना: भारत

Image caption विस्फोट की वजह से होटल की बिल्डिंग पूरी तरह से तबाह हो गई

भारत के विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने कहा है कि काबुल में भारतीयों को निशाना बनाकर किए गए हमलों के पीछे उन लोगों का हाथ है जो नहीं चाहते कि भारत और अफ़ग़ानिस्तान के रिश्ते दोस्ताना बने रहें.

उन्होंने इस हमले की निंदा की है.

इससे पहले अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने कहा था कि हमले का मकसद काबुल में काम करने वाले भारतीयों को निशाना बनाना था.

उन्होंने कहा है कि इस हमले से भारत के साथ अफ़गानिस्तान के संबंधों पर असर नहीं पड़ेगा.

अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी क़ाबुल में शुक्रवार को हुए आत्मघाती बम धमाके में कम से कम सोलह लोग मारे गए थे. इनमें नौ भारतीय नागरिक हैं. मरनेवालों में सरकारी अधिकारी भी शामिल हैं.

हमले में एक फ्रांसीसी फ़िल्म निर्माता, इटली के एक राजनयिक और तीन अफ़गान पुलिसकर्मी भी मारे गए हैं.

इस हमले में करीब 36 लोग ज़ख्मी भी हुए हैं.

हमले की ज़िम्मेदारी तालेबान ने ली है.

निंदा

भारतीय विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है, "भारत इस हमले की निंदा करता है. पिछले 20 महीनों में भारतीय अधिकारियों या प्रतिष्ठानों पर ये तीसरा हमला है. जुलाई 2008 और अक्तूबर 2009 में भारतीय दूतावास पर हमले में कई भारतीय राजनयिकों और अधिकारियों की जान गई थी."

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने भी इस हमले की कड़ी निंदा की है और कहा है,‘‘बेगुनाह नागरिकों को निशाना बना कर किए गए इन हमलों से साफ़ पता चलता है कि इन्हें अंजाम देने वाले चरमपंथियों को इंसानों की ज़िंदगी की कोई परवाह नहीं है."

गोलीबारी और आत्मघाती हमला

चार घंटे तक चली चरमपंथी कार्रवाई की शुरुआत शुक्रवार को सुबह करीब साढ़े छह बजे हुई जब आर्या गेस्ट हाउस के पास खड़ी कार में धमाका हो गया.

इस गेस्ट हाउस में भारतीय डॉक्टर रहते हैं. इनमें से कुछ इंदिरा गांधी चाइल्ड हेल्थ इंस्टीट्यूट में काम करते हैं.

पास के एक होटल में रहने वाले डॉक्टर सुबोध संजीव पॉल ने बताया,‘‘लगातार हो रही फ़ायरिंग की वजह से मैं तीन घंटे तक अपने कमरे के बाथरूम में बंद रहा.’’

हमले में डॉक्टर सुबोध के पैर में चोट लगी है और सेना के अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है.

पुलिस के मुताबिक बड़े धमाके के बाद कुछ छोटे-छोटे धमाके भी हुए. हमला करने वाले दो हमलावरों को मार गिराया गया है.

गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ज़ेमाराई बशारी ने बताया कि "आत्मघाती हमलावर ने जानेमाने पार्क रेसीडेंसी होटल और मार्केट कॉम्प्लेक्स सैफ़ी लैंडमार्क के पास एक कबाब की दुकान के सामने खुद को उड़ा लिया. इसके बाद दो अन्य लोगों ने गोलीबारी की हालांकि तालेबान का कहना है कि हमले में पांच फ़िदायीन शामिल थे".

काबुल हमले के दो घंटे बाद एसोसिएटेड प्रेस को फ़ोन कर तालिबान प्रवक्ता ज़बिउल्लाह मुजाहिद ने कहा, ‘‘हमले का मक़सद विदेशियों के दो ठिकानों को निशाना बनाना था."

हालांकि उसने भारत का नाम नहीं लिया.

जवाबी कार्रवाई

तालेबान अफ़गानिस्तान में भारत की मौजूदगी और नॉर्दर्न अलायंस के साथ इसके सहयोग का शुरू से विरोध करता रहा है क्योंकि नॉर्दर्न अलायंस ने अमरीका के साथ मिलकर 2001 में तालेबान शासन के ख़ात्मे में मदद की थी और करज़ई की सरकार को मज़बूत आधार प्रदान किया था.

यह कार्रवाई ऐसे समय पर हुई है जब अफ़ग़ानिस्तान के हेलमंद प्रांत में अमरीकी और नैटो फ़ौजों ने तालेबान के ख़िलाफ़ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई शुरु की है.

पिछले हफ़्तों में दो दर्जन से ज्यादा तालेबान नेता पाकिस्तान में पकड़े गए हैं.

विश्लेषकों का मानना है कि ताज़ा हमला इसी की प्रतिक्रिया है.

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