ज़िंदा दफ़न मामले में सज़ा

  • 9 मार्च 2010
पाकिस्तान में महिलाओं की हत्या के ख़िलाफ़ प्रदर्शन
Image caption पुलिस रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं को बुरे आचरण के कारण ज़िंदा दफ़न किया गया था.

पाकिस्तान में बलूचिस्तान के ज़िले जाफ़राबाद में आतंकवाद निरोधक अदालत ने दो महिलाओं को ज़िंदा दफ़न किए जाने संबंधी मुक़दमे में चार लोगों को 25-25 साल की सज़ा और एक-एक लाख रुपए के जुर्माने का आदेश दिया है.

अदालत ने एक अन्य व्यक्ति को छह महीने की क़ैद, जबकि 16 अभियु्क्तों को बाइज़्जत बरी करने का आदेश दिया.

दो महिलाओं के ज़िंदा दफ़न किए जाने का मामला अगस्त 2008 का है. पुलिस रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं को बुरे आचरण के कारण ज़िंदा दफ़न किया गया था.

इस घटना के समाने आने के बाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकार संगठनों ने इसकी जम कर निंदा की थी.

सज़ा और जुर्माना

मंगलवार को न्यायाधीश मोहम्मद आलम मैंगल ने चार अभियुक्तों ग़ौस बख़्श, रहमत अली, मोहम्मद आरिफ़ और मेहरल्लाह को 25-25 वर्ष तक की सज़ा सुनाई जबकि एक अभियुक्त मोहम्मद ज़ाहिद को छह महिने की क़ैद की सज़ा सुनाई.

अदलात ने सबूतों के अभाव में 16 अभियुक्तों को बरी कर दिया.

दो महिलाओं के ज़िंदा दफ़न किए जाने के मामले में पाकिस्तान की केंद्रीय सरकार और बलूचिस्तान की राज्य सरकार ने 22 लोगों को हिरासत में लिया था.

इस घटना के बाद महिलाओं ने कड़ा रुख़ अपनाया था और मांग की थी कि गुनाहगारों को सख़्त से सख़्त सज़ा दी जाए.

उनका कहना था कि जहां ये घटना घटी है वहाँ पिछड़ापन बहुत अधिक है और बेरोज़गारी और शिक्षा की कमी की वजह से जागीरदारों और सरदारों का बोलबाला है.