तालेबान नेता की गिरफ़्तारी की आलोचना

काई ईदी
Image caption ईदी ने पाकिस्तान की भूमिका की आलोचना की.

अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र के पूर्व विशेष प्रतिनिधि काई ईदी ने कहा है कि एक वरिष्ठ तालेबान नेता की पाकिस्तान में गिरफ़्तारी से शांति वार्ता को धक्का पहुँचा है.

उन्होंने पिछले महीने अपना पद छोड़ने के बाद बीबीसी को दिए पहले इंटरव्यू में बताया कि तालेबान नेता मुल्ला बिरादर के साथ वह शांति वार्ता कर रहे थे.

उन्होंने कहा कि बात आगे बढ़ रही थी लेकिन इसी बीच पाकिस्तान में बिरादर को गिरफ़्तार कर लिया गया.

ईदी के मुताबिक तालेबान के साथ बातचीत पिछले साल ही शुरु हो गई थी लेकिन इस गिरफ़्तारी से बातचीत रुक गई.

उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने शांति वार्ता रोकने के लिए ही ये कार्रवाई की है.

हालांकि लंदन में पाकिस्तान के उच्चायुक्त वाजिद शम्शुल हसन ने कहा कि अमरीकी सेना के साथ साझा कार्रवाई में ये गिरफ़्तारी हुई है और पाकिस्तान का मक़सद शांति वार्ता में बाधा पहुँचाना नहीं है.

बातचीत का ब्यौरा

ईदी ने कहा कि तालेबान नेता के साथ दुबई और अन्य जगहों में उनकी आमने-सामने बातचीत हुई थी.

वो कहते हैं, "हमने पहली बार लगभग एक साल पहले संपर्क साधा था. इसके बाद चुनाव प्रक्रिया शुरु हुई तब ठहराव आया. लेकिन चुनाव के बाद बातचीत में तेज़ी आई और ये कुछ हफ़्ते पहले तक चल रही थी."

पूर्व अफ़ग़ान प्रतिनिधि ने कहा कि तालेबान के साथ बातचीत के कई रास्ते खुले थे और राष्ट्रपति हामिद करज़ई के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी इसमें शामिल थे.

हालाँकि ईदी ने उन संपर्क सूत्रों के बारे में विस्तार से बताने से इनकार कर दिया जिनकी मदद से बातचीत चल रही थी.

उन्होंने चेतावनी दी कि अब फिर से बातचीत के लिए दोनों पक्षों में परस्पर विश्वास पैदा करने में महीनों लग जाएंगे.

ईदी ने कहा कि उन्हें करज़ई के एक वरिष्ठ सहयोगी ने बताया था कि तालेबान के साथ उनके संपर्क भी बढ़ गए थे लेकिन गिरफ़्तारी ने इस प्रक्रिया को चोट पहुँचाई.

उन्होंने पाकिस्तान पर इस राजनीतिक प्रक्रिया में ठेस पहुँचाने का आरोप लगाते हुए कहा, "पाकिस्तान को जो भूमिका निभानी चाहिए वो वह नहीं निभा रहा है."

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