पाकिस्तान में दलित हिंदू का सम्मान

डॉक्टर सोनो खांघराणी
Image caption डॉक्टर सोनो खांघराणी समाजिक क्षेत्रों में काम करते हैं

पाकिस्तान दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी ने अनुसूचित जाति के एक हिंदू व्यक्ति को सामाजिक क्षेत्र में उनके योगदान के लिए राष्ट्र के एक बड़े नागरिक पुरस्कार से सम्मानित किया है.

सिंध के राज्यपाल डॉक्टर इशरतुल इबाद ने कराची में आयोजित एक सरकारी आयोजन में राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी की ओर से पाकिस्तानी की सामाजिक संस्था थर्दीप रुरल डेवेलोप्मेंट प्रोग्राम के प्रमुख डॉक्टर सोनो खांघराणी को "तमग़-ए-इम्तियाज़" यानी श्रेष्ठता का पदक दिया.

सामाजिक क्षेत्र में उन की सेवाओं को देखते हुए सरकार ने उन्हें यह पुरस्कार दिया है और वे पिछले कई वर्षों से सिंध प्रांत में स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्रों में काम कर रहे हैं.

पाकिस्तान सरकार ने पहली बार किसी दलित हिंदू को सरकारी नागरिक पुरस्कार से सम्मानित किया है.

सम्मान मेहनत का

पुरस्कार लेने के बाद उन्होंने बीबीसी से कहा, "मेरे समुदाय के किसी व्यक्ति को पहली बार यह सरकारी पुरस्कार मिला है और मुझे काफी ख़ुशी हो रही है. मैं अपनी ख़ुशी को बयान भी नहीं कर सकता."

उन्होंने आगे कहा, "कम से कम सरकार ने हमारे काम की प्रशंसा की है और मुझे अपने काम पर गर्व है."

डॉक्टर सोनो ने बताया, "कोई भी हो और उनका किसी भी समुदाय से संबंध हो, अगर ईमानदारी के साथ मेहनत की जाए तो एक दिन ज़रूर उसकी प्रशंसा होती है."

उनके मुताबिक़ सरकारी पुरस्कार मिलने के बाद उन्हें प्रोत्साहन मिला है और अब वो सिंध प्रांत के साथ-साथ पूरे पाकिस्तान में काम करना चाहेंगे.

डॉक्टर सोनो खांघराणी का संबंध सिंध के सबसे पिछड़े ज़िला थारपार्कर से हैं और वर्ष 1954 में गांव सड़ जोनेजा में एक ग़रीब दलित परिवार में उनका जन्म हुआ. उन्होंने प्राथमिक शिक्षा अपने ज़िले से प्राप्त की.

ज़िला थारपार्कर भारत के राज्य राजस्थान और गुजरात की सीमा से सटा हुआ है और वहाँ रहने वालों में बड़ी संख्या अनुसूचित जाति की है. ज़िले में 80 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो ग़रीबी रेखा से नीचे जीवन बिता रहे हैं और ज़िले में ज़रूरी सुविधाओं का अभाव है.

वर्ष 1974 में जब उन्होंने मैट्रिक परीक्षा पास की तो उस समय थारपार्कर में भीषण सूखा पड़ा और ग़रीब परिवार से संबंध होने के कारण वे कॉलेज में दाख़िला नहीं ले सके.

वर्ष 1975 में उन्होंने एक फैकट्री में काम करना शुरु किया और साथ की सिंध के हैदराबाद के करीब एक कृषि कॉलेज में पढ़ाई शुरु की.

वो भारत और अमरीका सहित कई देशों की यात्रा कर चुके हैं और अनुसूचित जाति की संस्था अंतरराष्ट्रीय दलित एकता नेटवर्क के सदस्य भी हैं.

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