अपने अधिकारों में कटौती चाहते हैं ज़रदारी

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने पार्लियामेंट से एक ऐसे विधेयक को पारित करने का अनुरोध किया है जिससे उनके कई अहम अधिकार प्रधानमंत्री और पार्लियामेंट के अधीन हो जाएँगे.

नए क़ानून के बन जाने के बाद राष्ट्रपति का चुनी हुई सरकार को बर्ख़ास्त करने और नए सेनाध्यक्ष की नियुक्ति का अधिकार छिन जाएगा.

विपक्ष इस विधेयक की लंबे अरसे से मांग करता आया है.

राष्ट्रपति ज़रदारी ने कहा कि ये विधेयक पाकिस्तान के लोगों के संघर्ष में मील का पत्थर साबित होगा.

पाकिस्तानी पार्लियामेंट आगामी कुछ दिनों में इसे पारित कर सकती है.

ज़रदारी का कार्यकाल

दरअसल कई पर्यवेक्षकों का मानना है कि आसिफ़ अली ज़रदारी देश में पैदा हुए नेतृत्व ख़ालीपन को भरने में कामयाब नहीं हो पाए हैं.

सेना अब भी सरकार के नियंत्रण से बाहर नज़र आती है, चरमपंथियों का सफ़ाया होना अभी दूर की बात लगती है और अर्थव्यवस्था का अब भी पटरी पर आना बाक़ी है.

राष्ट्रपति भवन में आसिफ़ अली ज़रदारी का प्रवेश बस एक संयोग ही कहा जा सकता है क्योंकि उनकी पत्नी बेनज़ीर भुट्टो की मौत के बाद उनका रास्ता बना था.

भले ही आसिफ़ अली ज़रदारी ने इस पद पर रहकर कोई करिश्मा नहीं दिखाया हो लेकिन इस पद पर टिके रहना ही अपने आप में एक उपलब्धि है.

संबंधित समाचार