श्रीलंका में मतदान संपन्न

  • 8 अप्रैल 2010
मतदान करते राजपक्षे और उनकी पत्नी
Image caption राष्ट्रपति चुनाव में मिली जीत के बाद महिंदा राजपक्षे ने तय समय से दो महीने पहले ही संसदीय चुनाव की घोषणा कर दी थी.

श्रीलंका में तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई के ध्वस्त हो जाने के बाद पहली बार नई संसद के गठन के लिए चुनावों में मतदान संपन्न हो गया है. राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने भी मतदान में हिस्सा लिया और हेम्बेनटोटा में अपना वोट डाला.

पर्यवेक्षकों ने हिंसा की छुट-पुट घटनाओं की सूचना दी है.

जनवरी में हुए राष्ट्रपति चुनावों में जीतने के बाद महिंदा राजपक्षे ने समय से दो महीने पहले संसदीय चुनाव कराने का फ़ैसला किया था.

राष्ट्रपति चुनावों में महिंदा राजपक्षे के मुख्य प्रतिद्वंद्वी रहे पूर्व सेनाध्यक्ष सरथ फोनसेका हिरासत में हैं और बीबीसी संवाददाता के अनुसार विपक्ष पूरी तरह बिखरा हुआ है.

बीबीसी संवाददाता के अनुसार विपक्ष सरकार की नीतियों की आलोचना एक स्वर में नहीं कर पा रहा है.

विपक्ष बिखरा हुआ है

देश में तमिल विद्रोहियों के साथ पिछले साल युद्ध समाप्त होने के बाद ये पहले संसदीय चुनाव था.

मतदान के दौरान किसी भी तरह की हिंसा से निपटने के लिए देशभर में सुरक्षा बलों के 80 हज़ार जवानों को तैनात किया गया था.

जनवरी में राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे अच्छे ख़ासे बहुमत से जीतकर दोबारा राष्ट्रपति बने थे. राजपक्षे को उम्मीद है कि संसदीय चुनावों के बाद देश की राजनीति पर उनकी पकड़ और मज़बूत हो जाएगी.

पूर्व सेनाध्यक्ष सरत फोनसेका जेल से ही संसदीय चुनावों में हिस्सा ले रहे हैं. फोनसेका के समर्थन में धरना प्रदर्शन तो हुए हैं लेकिन इनकी संख्या कम ही रही है.

देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी ने जनरल फोनसेका से ख़ुद को अलग कर लिया है जबकि तमिल गठबंधन पूर्व और उत्तर के इलाक़े में अपने दम पर चुनाव लड़ रहा है. तमिल गठबंधन ने राष्ट्रपति चुनावों के दौरान फोनसेका को समर्थन दिया था.

तमिल विद्रोह को ख़त्म करने के बाद राजपक्षे की देश भर में लोकप्रियता बढ़ी है. उनका दावा है कि तमिल इलाक़ों में बड़े विकास कार्य करने से तमिल जनता देश से जुड़ेगी.

हालांकि राजपक्षे के आलोचक कहते हैं कि वो अल्पसंख्यक समुदाय के साथ अर्थपूर्ण तरीके से संबंध बढ़ाने की कोशिश नहीं कर रहे हैं.

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