शेरपा करेंगे एवरेस्ट की सफ़ाई

  • 20 अप्रैल 2010
माउंट एवरेस्ट
Image caption माउंट एवरेस्ट दुनिया भर के पर्वतारोहियों को आकर्षित करता है

नेपाली शेरपाओं के एक दल का कहना है कि वे दुनिया की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट पर एक सफ़ाई अभियान की योजना बना रहे हैं.

इसमें वे लोग न सिर्फ़ कचरे की सफ़ाई करेंगे बल्कि वे कई बरसों में वहाँ मारे गए लोगों के अवशेष भी हटाएँगे.

इसके लिए शेरपाओं को आठ हज़ार मीटर की ऊँचाई पर काम करना पड़ेगा.

ऊँचाई और विषम परिस्थितियों के कारण माउंट एवरेस्ट को मौत की घाटी के रूप में भी देखा जाता है.

योजना

बीस शेरपाओं का एक दल पहली मई से यह अभियान शुरु करेगा.

उनका कहना है कि वे समुद्र तल से आठ हज़ार मीटर की ऊँचाई पर एवरेस्ट साउथ कोल के नाम से मशहूर जगह पर कैंप करेंगे और वहीं से सफ़ाई अभियान की शुरुआत की जाएगी.

उनका कहना है कि उनके इस अभियान में कचरे की सफ़ाई के अलावा साउथ कोल और शिखर के बीच कम से कम दो मृतकों के अवशेष को हटाना भी शामिल है.

Image caption पर्वतारोही वापस लौटते हुए अपना सामान वहीं छोड़ते रहे हैं

वहाँ रास्ता दुर्गम है, ऑक्सीजन की कमी है और तापमान बहुत कम होता है.

इससे पहले भी एवरेस्ट पर सफ़ाई अभियान हो चुका है लेकिन वो सब आठ हज़ार मीटर से कम ऊँचाई पर हुआ था.

उस ऊँचाई पर पहली बार कोई सफ़ाई अभियान होने जा रहा है.

इस दल में शामिल शेरपाओं में से कुछ तो कई बार एवरेस्ट के शिखर तक जा चुके हैं.

उनका कहना है कि उनका लक्ष्य 3000 किलोग्राम कचरे की सफ़ाई है, जिसमें ऑक्सीजन की खाली बोतलें, खाने के खाली पैकेट, पुराने टेंट और रस्सियाँ शामिल हैं.

उनका कहना है कि वे जानते हैं कि उनका अभियान कठिन और ख़तरनाक साबित होगा.

चूंकि हिमालय पर भी तापमान बढ़ रहा है इसलिए बर्फ़ पिघल रही है और कई दशकों में वहाँ ले जाकर छोड़ा गया कचरा अब दिखाई पड़ने लगा है.

नेपाल सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए अब एवरेस्ट पर जाने वाले हर पर्वतारोही के लिए यह आवश्यक कर दिया है कि जब वह वापस लौटे तो अपना कचरा वापस लेकर लौटे या फिर उसे 4000 डॉलर की जमा राशि वापस नहीं मिलेगी.

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