पाकिस्तान में भारी बिजली संकट

  • 21 अप्रैल 2010
Image caption पाकिस्तान में बिजली कटौती के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हुए हैं

पाकिस्तान इस समय बिजली के भारी संकट से जूझ रहा है और अधिकतर इलाक़ों में 15 से 20 घंटे बिजली की कटौती चल रही है.

बिजली की लोडशेडिंग के ख़िलाफ़ देश भर में विरोध प्रर्दशन भी हो रहे हैं और व्यापार भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है.

प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी की अध्यक्षता में मंगलवार को इस संकट से निपटने के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक हुई जिसमें विभिन्न उपायों पर विचार विमर्श किया गया.

पिछली कई महीनों से पाकिस्तान बिजली के भारी संकट से जूझ रहा है और छोटे बड़े हर शहर और गाँव में 15 से 20 घंटे की लोडशेडिग सामान्य बात बन चुकी है.

कराची, लाहौर, फैसलाबाद, सखर, मर्दान सहित कई शहरों में लोग सड़कों पर हैं और ज़रूरी सुविधा न होने के ख़िलाफ़ विरोध कर रहे हैं.

पानी और बिजली के केंद्रीय मंत्री राजा परवेज़ अशरफ़ ने बताया कि पाकिस्तान को जितनी बिजली की ज़रूरत है, उतना उत्पादन नहीं हो रहा है और जिस की वजह से लोडशेडिंग करनी पड़ रही है.

उन्होंने बताया, “हमारे पास क़रीब एक बटा तीन हिस्सा ज़रूरत का मौजूद नहीं है, सादा शब्दों में 24 घंटों में से आठ घंटे बिजली मौजूद नहीं है.”

उन्होंने कहा, “यदि बिजली के उत्पादन में कोई समस्या होती है तो और संकट पैदा होता है.”

बिजली की कमी

ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान को 15 हज़ार मेगावॉट बिजली की ज़रूरत है लेकिन केवल 10 हज़ार मेगावॉट का उत्पादन हो रहा है.

पाकिस्तान में अधिकतर बिजली का उत्पादन जलविद्युत प्रणाली से होता है.

पाकिस्तान इलेक्ट्रिक पॉवर कंपनी के प्रमुख बशारत चीमा ने बीबीसी को बताया कि नदियों में पानी की कम के कारण बिजली का उत्पादन कम हो रहा है.

उन्होंने उम्मीद जताई कि आगे चल कर यह सकंट किसी हद तक ख़त्म हो जाएगा.

उन्होंने कहा, “भविष्य में कोशिश होगी कि जो आजकल लोडशेडिंग हो रही है वो न हो और आगे चल कर इस नियंत्रण किया जाएगा.”

उनके मुताबिक जब तक बिजली के उत्पादन के लिए नए प्लांट नहीं लगेंगे तब तक संकट ख़त्म होना काफ़ी मुश्किल है.

वर्तमान सरकार ने बिजली के इस सकंट के लिए पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ की सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया है.

लंदन में रह रहे पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ ने सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट फेसबुक पर इस आरोप का खंडन किया है.

बिजली की लोडशेडिंग और उसके ख़िलाफ हो रहे प्रदर्शनों को देखते हुए प्रधानमंत्री यूसुफ रज़ा गिलानी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तीय बैठक हुई जिसमें बिजली के संकट को ख़त्म करने के लिए उचित क़दम उठाने पर बल दिया गया.

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