हिरासत से संसद पहुँचे फ़ोन्सेका

  • 22 अप्रैल 2010
फ़ोन्सेका
Image caption फ़ोन्सेका के ख़िलाफ़ कोर्ट मार्शल चल रहा है

श्रीलंका के राष्ट्रपति चुनाव में हार का मुँह देखने वाले और कोर्ट मार्शल का सामना कर रहे सरथ फ़ोन्सेका को संसद के उदघाटन सत्र में शामिल होने की छूट दी गई है.

संसद में अपने भाषण के दौरान उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी और इस समय देश के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे पर निशाना साधते हुए देश में क़ानून के शासन की मांग की.

फ़ोन्सेका ने कहा, "देश को लोकतंत्र चाहिए, क़ानून का शासन चाहिए, निजी स्वतंत्रता और मीडिया की आज़ादी चाहिए."

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि फ़ोन्सेका को सिर्फ़ संसद के उदघाटन सत्र में शामिल होने की अनुमति दी गई है, इसके बाद उन्हें फिर से हिरासत में भेज दिया जाएगा.

हाल ही में हुए संसदीय चुनाव में फ़ोन्सेका की पार्टी डेमोक्रेटिक नेशनल अलायंस को सात सीटें हासिल हुई हैं. एक सीट से फ़ोन्सेका को भी जीत मिली. हालाँकि उस समय वे हिरासत में थे.

इस चुनाव में राजपक्षे की पार्टी को अच्छी सफलता हासिल हुई, लेकिन वो दो तिहाई बहुमत से चूक गई.

देश के संविधान में बदलाव के लिए दो तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है. मौजूदा संविधान के मुताबिक़ कोई भी व्यक्ति दो बार से ज़्यादा राष्ट्रपति नहीं रह सकता.

गिरफ़्तारी

इस साल आठ फरवरी को फ़ोन्सेका को भ्रष्टाचार के आरोप में हिरासत में लिया गया था. उसके बाद से फ़ोन्सेका ने पहली बार कोई सार्वजनिक बयान दिया है.

Image caption राजपक्षे और फ़ोन्सेका के रिश्ते बिगड़ गए थे

संसद के सत्र में शामिल होने के लिए वे सैनिकों की पहरेदारी में सदन में पहुँचे.

पिछले साल मई में एलटीटीई के ख़िलाफ़ जीत हासिल करने के बाद तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल सरथ फ़ोन्सेका और राष्ट्रपति राजपक्षे के आपसी संबंध ख़राब हो गए थे.

इस साल जनवरी में हुए राष्ट्रपति चुनाव में महिंदा राजपक्षे ने उन्हें मात दे दी थी. इसके बाद उन्हें सेना प्रमुख के पद पर रहते राजनीति में शामिल होने और भ्रष्टाचार के आरोपों में गिरफ़्तार कर लिया गया है.

इस समय फ़ोन्सेका के ख़िलाफ़ कोर्ट मार्शल की कार्रवाई चल रही है. फ़ोन्सेका अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार करते हैं. उनका कहना है कि ये सब राजनीति से प्रेरित है, जिसका मक़सद उन्हें चुप कराना है.

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