दो भारतीय बच्चों की होगी रिहाई

  • 23 अप्रैल 2010

पाकिस्तान की एक अदालत ने दो भारतीय बच्चों को रिहा करने का आदेश दिया है.

पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने कुछ महीने पहले जलसीमा का उल्लघंन करने के आरोप में 14 वर्षीय महेश और 13 वर्षीय चेननी को अन्य मछुआरों के साथ गिरफ्तार किया था.

सुरक्षाबलों का कहना था कि भारतीय मछुआरे अवैध रूप से पाकिस्तान की जल सीम में मछली का शिकार कर रहे थे.

सुरक्षाबलों ने भारतीय मछुआरों को कराची पुलिस के हवाले किया था जिनके ख़िलाफ प्राथमिकि दर्ज की गई थी.

पाकिस्तान में बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था स्पार्क ने इन भारतीय बच्चों की रिहाई के लिए अदालत में याचिका दायर की थी.

स्पार्क के वकील ग़ुलाम मदनी मेमन ने बीबीसी को बताया, “बच्चों से मेरी मुलाक़ात जेल के अंदर हुई थी, वे उर्दू भाषा नहीं जानते और दोनों का संबंध भारतीय राज्य गुजरात से है.”

क़ैदियों की रिहाई

दोनों बच्चे जज ग़ुलाम यासीन कोलाची के समक्ष पेश हुए और अदालत ने बच्चों का बयान रिकॉर्ड किया.

बच्चों ने अदालत को बताया कि उन्होंने ग़लती से पाकिस्तान की सीमा में प्रवेश किया.

इसके बाद अदालत ने गृह मंत्रालय को आदेश दिया कि दोनों बच्चों को भारत भेजने की व्यवस्था की जाए.

अदालत ने अपने फैसला में आगे कहा कि दोनों ने स्वीकार किया है कि उन्होंने जल सीमा का उल्लंघन किया और सरकार को यह अधिकार है कि उन का मुक़दमा ख़त्म कर उन्हें अपने देश भेजा जाए.

स्पार्क संस्था के वकील ग़ुलाम मदनी मेमन ने बीबीसी को बताया कि उन्होंने सिंध हाई कोर्ट में यह भी याचिका दायर की है जिसमें अदालत से आग्रह किया गया है कि सिंध के जेलों में 400 के करीब भारतीय नागरिक ऐसे हैं जिनकी सज़ा पूरी हो चुकी है लेकिन उन्हें रिहा नहीं किया जा रहा है.

उन्होंने अदालत से इस मामले में अपने आप संज्ञान लेने का आग्रह किया.

सिंध हाई कोर्ट के मुख्य न्यायधीश जस्टिस सरमद जलाल उस्मानी ने प्रतिरक्षा और विदेश मंत्रालय को आदेश दिया कि इन भारतीय मछुआरों की रिहाई के लिए होने वाली प्रगति से अदालत को अवगत किया जाए.

अदालत ने जेल अधिकारियों को भी आदेश दिया कि भारतीय मछुआरों की सूचि अदालत में पेश की जाए.

ग़ौरतलब है कि दोनों देशों ने क़ैदियों की रिहाई और उनके मुक़दमों का आकलन करने के लिए सेवानिवृत्त जजों की एक समिति का गठन किया है जिस पर मुंबई हमलों के बाद काम नहीं हो रहा है.

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