सार्कमय हुआ भूटान

  • 26 अप्रैल 2010

भूटान बिलकुल सार्कमय हो रहा है. इतना छोटा यह देश है कि यहाँ अगर एक भी विदेशी हस्ती आ जाए तो प्रशासन में हडकंप मच जाता है.

अब ज़रा सोचिए क्या हाल हो रहा हो तब जब एक नहीं दो नहीं, आठ आठ राष्ट्राध्यक्ष पधार रहे हों.

यहाँ का एयरपोर्ट पारो में है जहा से राजधानी थिम्पू आने में एक सवा घंटा लगता है.

इस सड़क के किनारे आपको हज़ारों बच्चे नज़र आ जाएंगे, सार्क सदस्य देशों के झंडे उठाए.

कम से कम इनकी किस्मत अच्छी है कि यहाँ मौसम सुहावना है और सूरज देवता की मेहरबानी थोड़ी कम है.

बच्चों के लिए फ़ायदा का सौदा इसलिए भी है कि स्कूल की छुट्टी है.

बढ़ता ज्ञान

Image caption आगंतुकों के स्वागत में खड़े बच्चे

कोई हम भारतीयों को देख सारे जहाँ से अच्छा गाने लगता है तो कोई हमे शेख हसीना बुलाता है यानि क्षेत्रीय सहयोग के काम पर सार्क चाहे जितन खरा उतरा हो बच्चों को ज़रूर क्षेत्र का ज्ञान मिल रहा है.

हवाई अड्डे पर लंबी लिस्टों के साथ युवा खड़े थे, लाइन से गाड़ियाँ लगी थीं.

यहाँ तक कि यहाँ की राष्ट्रीय विमान सेवा द्रुक एयर ने पत्रकारों के लिए कोलकाता से पारो के लिए विशेष विमान सेवा का इंतजाम किया था.

हवाई अड्डे पर आपके नाम की पर्चियाँ थीं और आपकी मदद के लिए थे स्वयं सेवक.

और जब आपकी आप्रवासन जांच पूरी हो जाती है तो राजधानी थिम्पू लाने के लिए बस सेवा भी है.

भारी ताम झाम

Image caption सार्क के लिए भारी व्यवस्था की गई है

आज तक कई सार्क शिखर बैठकें देखीं पर ऐसा ताम झाम कही नहीं था.

शायद कई बार मूलभूत ढांचा न होने के कारण सार्क न करवा सके भूटान को सार्क की रजत जयंती पर कुछ कर दिखाने का मन था.

पूरा देश ही लगता है इसकी तैयारी में जुट गया. सरकारी अमला हो, उद्योग हो या साधारण नागरिक सभी जुटे हैं सार्क को सफल बनाने के लिए.

शायद ऐसा जलसा भूटान ने राजा के राज्याभिषेक के समय देखा होगा.

पर तब भी देशो के नुमाइंदे ही आए थे पर अब की बार तो न केवल नेता उनके साथ पूरी नौकरशाही, अधिकारी सभी पहुँचे हैं.

और रिश्तों की नाजुकता को देखते है सबको अलग जगह ठहराया गया है ताकि नेता जब मिलना चाहें तभी मिलें, तभी आमने सामने हों.

हर देश और नेता की पसंद नापसंद का ख्याल रखा जा रहा है और ऐसा लगता है मानो थिम्पू को तो सरकार ने अपने कब्ज़े में ले लिया है.

जिसे गाड़ी चलानी आती है, उसे अपना काम धाम छोड़ ड्राइवरी करनी पड़ रही है. जिसे कंप्यूटर की जानकारी है, वो इसी काम में लगा है.

भीड़ भाड़ से शहर को बचाने के लिए सरकार ने बीजिंग में आलंपिक के समय की चीन की योजना को अपनाया है.

कुछ सड़कें भीड़ के समय बंद रखी जा रही हैं तो कुछ खास नंबर की गाड़ियाँ हीं निर्धारित दिनो पर चलेंगी यानि तकलीफ़ से बचने के हर उपाय को आज़मा के देखा जा रहा है.

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