डेढ़ घंटा चली बातचीत

  • 29 अप्रैल 2010
सार्क नेता
Image caption थिम्पू में सार्क देशों के नेता एक मंच पर एक साथ नज़र आए

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी गुरुवार को दोपहर थिम्पू में मुलाक़ात हुई है और दोनों नेताओं के बीच डेढ़ घंटे तक बातचीत हुई.

पिछले साल जुलाई में मिस्र के शर्म अल शेख में हुई मुलाक़ात के बाद दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच यह पहली मुलाक़ात थी और इस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें लगी हुई हैं.

हालाँकि फ़रवरी में दोनों देशों के बीच विदेश सचिव स्तर की बातचीत हुई थी. उसमें तय किया गया था कि दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व में चर्चा होनी चाहिए लेकिन उसके बाद भारत अंतिम समय तक सार्क बैठक के दौरान पाकिस्तान से बातचीत की पुष्टि करने से बचता रहा.

यूसुफ रज़ा गिलानी और मनमोहन सिंह के बीच होने वाली बातचीत को भारत व्यापक वार्ता प्रक्रिया से जोड़ कर नहीं देखता और इसे एक सीमित मुलाक़ात के रुप में ही दर्शाना चाहता है.

हालांकि पाकिस्तान ने कहा है कि वह सभी मुद्दों पर चर्चा करना चाहता है.

वैसे मनमोहन सिंह की गुरुवार को ही नेपाल और बांग्लादेश के शीर्ष नेतृत्व के साथ भी द्विपक्षीय वार्ता होने की संभावना है.

मुद्दे

वर्ष 2008 के नवंबर में मुंबई में हुए चरमपंथी हमलों के बाद से भारत ने पाकिस्तान के साथ चल रही व्यापक शांति प्रक्रिया को स्थगित कर दिया था. उसके बाद से दोनों देशों के बीच चल रही वार्ताओं का सिलसिला भी रुका हुआ है.

Image caption मुंबई हमलों ने दोनों देशों के बीच जो तनाव पैदा किया वह अभी भी बना हुआ है

इस घटना के बाद शर्म अल शेख में दोनों देशों के नेताओं के बीच पहली बार मुलाक़ात हुई थी लेकिन वह बातचीत भी सीमित थी.

इसके बाद परमाणु सम्मेलन में दोनों नेता मिले ज़रुर लेकिन हाथ मिलाने के अलावा कुछ नहीं हुआ.

थिंपू में होने वाली मुलाक़ात में भारत चाहता है कि बातचीत आतंकवाद और पानी के बँटवारे पर सीमित हो, जिसे पाकिस्तान ने ख़ुद उठाया था.

लेकिन पाकिस्तान चाहता है कि इस मुलाक़ात में कश्मीर सहित सभी मुद्दों पर बातचीत होनी चाहिए.

मुंबई हमलों के संबंध में भारत ने अब तक पाकिस्तान को तीन दस्तावेज़ सौंपे हैं. इसके जवाब में पाकिस्तान ने मुंबई हमले के मुख्य अभियुक्त अजमल कसाब और फहीम अंसारी को पाकिस्तान को सौंपने मांग की है ताकि पाकिस्तान में मुंबई के मुक़दमों को तेज़ी से आगे बढ़ाया जा सके.

वहीं भारत कहता रहा है कि पाकिस्तान आतंकवाद से निपटने में गंभीरता नहीं दिखा रहा है और हाफिज़ सईद के ख़िलाफ़ कार्रवाई की भारत की मांग को नज़रअंदाज़ कर रहा है.

यानी जिस माहौल में बातचीत हो रही है, दोनों देशों में विश्वास की जितनी कमी है और इतिहास का जितना बोझ है उसमें यह ख़तरा पूरा है कि ये बातचीत भी औपचारिकता भर रह जाए.

लेकिन गिलानी-मनमोहन के बीच होने वाली इस मुलाकात पर फिर भी सबकी नज़र रहेगी. दक्षिण एशियाई देशों की भी और अमरीका-ब्रिटेन जैसे बड़े देशों की भी.

मनमुटाव की छाया

भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव की छाया थिंपू में सार्क शिखर बैठक में बुधवार को साफ़ दिखाई दी.

कई नेताओं ने प्रकारांतर से दोनों देशों के बीच तनाव दूर करने की बात पर ज़ोर दिया.

भूटान के प्रधान मंत्री जिंग्मे थिनले ने भारत की ओर इशारा करते हुए कहा कि बातचीत से ही समस्याएँ हल होती हैं और पड़ोसियों के झगड़े क्षेत्र के विकास पर असर डालते हैं.

जिंग्मे थिनले ने कहा, "हर दक्षिण एशियाई ये जानता है कि बँटे हुए परिवार कभी खुश नहीं रहते. अगर पड़ोसियों के बीच आपसी मतभेद और विवाद क़ायम रहते हैं तो समृद्धि नहीं आ सकती."

मालदीव के युवा राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने बिना लाग लपेट के सीधे सीधे भारत पाकिस्तान का नाम लेकर सार्क के मूल उद्देश्य की ओर ध्यान खींचने की कोशिश की.

उनका कहना था सार्क की नींव मनमुटाव नहीं सहयोग पर टिकी है और भारत-पाकिस्तान को इस पर ध्यान देना चाहिए.

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