पाकिस्तान के रंग बिरंगे ट्रक

पाकिस्तानी ट्रक
Image caption पाकिस्तान में आम तौर पर एक ट्रक की सजावट पर 60 से 70 हज़ार रुपय का ख़र्चा आता है

पाकिस्तान की सड़कों पर रंग बिरंगे और ख़ूबसूरत ट्रकें सरपट दौड़ते दिखते हैं. ट्रकों पर विभिन्न तरह की कारीगरी भी दिखती है जो पाकिस्तान की संस्कृति का एक हिस्सा है.

अताऊल्लाह ख़ान ईसा ख़ेलवी की आवाज़ में बजता लोक संगीत और सकड़ों पर दौड़ते ट्रकों का गहरा संबंध है. पेशावर से कराची तक की लंबी दूरी तय करने वाले ट्रक ड्राईवरों के मनोरंजन का साधन ही केवल संगीत है.

पाकिस्तान के ट्रक की कला दुनिया भर में जानी जाती है और इन ट्रकों को देख कर लगता है कि कलाकार ने कितनी मेहनत से इस को सजाया है.

लाहौर के रहने वाले मोहम्म्द पिछले 25 सालों से ट्रकों की सजावट का काम करते हैं. उन्होंने ट्रकों की सजावट के लिए इस्तेमाल होने वाली सामग्री के बारे में विस्तार से बताया.

संस्कृति का हिस्सा

उन्होंने कहा, “हम ट्रकों को ख़ुद सजाते हैं और यह सामग्री जपान, चीन और इटली से आती है. इस में रंगीन शीट का बहुत ज़्यादा काम होता है और इस को काट कर ट्रक पर लगाते हैं.”

यह ट्रक पाकिस्तान में एक शहर से दूसरे शहर तक सामान की आपूर्ति का सब से बड़ा साधन हैं और इन ट्रकों को पाकिस्तान की लाईफ़ लाईन भी कही जाता है.

मोहम्मद बताते हैं कि यूं तो पूरे देश में ट्रकों की सजावट का काम किया जाता है लेकिन उनके पास भी पूरे पाकिस्तान सहित चीन और अफग़ानिस्तान से भी लोग आते हैं.

उनके मुताबिक़ एक ट्रक की सजावट पर 60 से 70 हज़ार रुपय का ख़र्चा आता है और इस के साथ ही पेंटिंग का काम अगल है.

उन्होने कहा कि अगर कोई अपना ट्रक सजवाने के लिए आता है तो पहले उन्हें पेटिंग करवानी पड़ती है.

माधुरी और काजोल

Image caption पाकिस्तान में ट्रकों पर ज़बरदस्त कविताएँ भी लिखी होती हैं.

उन्होंने कहा कि ट्रकों की सजावट का काम कई चरणों में किया जाता है, पहले इस की बॉडी को रंगा जाता है और बाद में इसको रंगीन शीट की मदद से सजाया जाता है.

ध्यान रहे कि अधिकतर ट्रकों पर भारतीय फ़िल्म अभिनेताओं या अभिनेत्रियों की तस्वीरों की पेंटिंग की जाती है.

ट्रक ड्राईवरों में मधुरी दीक्षित, काजोल और एश्वरिया राय काफी लोकप्रीय हैं. कुछ ट्रकों पर दिलीप कुमार की तस्वीरें भी पेंट की जाती हैं.

मोहम्मद इक़बाल बताते हैं कि ट्रक मालिक बड़े शौक़ से अपने ट्रकों को सजवाते हैं क्योंकि वह किसी यादगार के तौर पर याद की जा सके.

इन ट्रकों पर ज़बरदस्त कविताएँ भी लिखी होती हैं. कुछ साल पहले ऑस्ट्रेलिया के शहर मेलबॉन में एक समारोह के दौरान पाकिस्तान के सजे हुए ट्रक को दिखाया गया तो इस कला की काफी प्रशंसा की गई थी.