पाकिस्तानी समलैंगिकों की व्यथा

दिल्ली हाई कोर्ट के फ़ैसले से भारत में जश्न
Image caption भारत में समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया तो इसपर पाकिस्तानी भी खिल उठे.

दिल्ली हाई कोर्ट ने जब जुलाई 2009 में अपने फ़ैसले में वयस्कों के बीच समलैंगिक संबंधों का अपराध की श्रेणी के बाहर रखने का फ़ैसला किया तो पाकिस्तान में भी अनेक समलैंगिक खुलकर सड़कों पर निकले आए और उन्होंने अपने प्रशासन के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किए.

पाकिस्तान में समलैंगिक हैं या नहीं, अपने आप से इस सवाल का जवाब खोजना मुश्किल था. लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद ये स्पष्ट हुआ कि पाकिस्तान में भी समलैंगिक लोग है जो अपने अधिकार चाहते हैं.

कराची के एक लोकप्रिय चीनी रेस्त्रां में मेरी मुलाक़ात कुछ समलैंगिकों से हुई जिनकी उम्र 15 से 20 साल के बीच थी.

पाकिस्तान में समलैंगिक हैं या नहीं इस का जवाब तहसीन ने दिया, "पाकिस्तान में हज़ारों समलैंगिक हैं और उनके मिलने के स्थान भी हैं, जहाँ वे हफ़्ते में एक बार इकट्ठा होते हैं."

दबाव के बीच लड़ाई

तहसीन ने आगे बताया, "जब हम पार्टी करते हैं तो उसमें कराची ही नहीं बल्कि पूरे देश के समलैंगिक आते हैं. पुलिस जानबूझ कर उन पार्टियों को बंद करवा देती है, हालांकि वो जानती है कि वहाँ पर कोई ग़ैरक़ानूनी काम नहीं होता है."

उनके अनुसार पाकिस्तान में समलैंगिक इंटरनेट के ज़रिए एक दूसरे के संपर्क में आते हैं और इस माध्यम से अपने अधिकारों की लड़ाई भी लड़ते हैं.

उनके अनुसार कई वेबसाईट्स हैं जिनपर पाकिस्तान के हज़ारों समलैंगिकों के प्रोफ़ाइल और उनकी तस्वीरें मौजूद हैं.

समाज में अपनी मुश्किलों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि वे बचपन में लड़कियों के साथ ज़्यादा खेलते थे इसलिए समाज में उन्हें मुश्किलें भी झेलनी पड़ीं.

उन्होंने बताया, "पाकिस्तान में ऐसे बहुत से उदाहरण हैं कि समलैंगिकों को ज़बरदस्ती लड़कियों से शादी करनी पड़ी है और बाद में लड़कियों की ज़िंदगी तबाह हो जाती है और अंत में तलाक़ हो जाता है."

तहसीन के अनुसार लोगों में जगरुकता नहीं है जिसके कारण समलैंगिकों का शोषण हो रहा है.

अधिकारों की मांग

Image caption पाकिस्तान में समलैंगिक आमतौर पर खुलकर सामने नहीं आते हैं

उन्होंने बताया कि वे चाहते हैं कि पाकिस्तान में ही उन्हें समलैंगिक संबंधों के अधिकार मिल जाएँ और वे अपना जीवन अच्छी तरह बिता सकें.

तहसीन के मुताबिक़ उन्होंने पाकिस्तान में ही अपने अधिकार पाने के लिए कुछ अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से संपर्क किया लेकिन उन्हें पाकिस्तान छोड़ने को कहा गया है.

तहसीन ने बताया कि अगर उन्हें पाकिस्तान में अधिकार नहीं मिले तो उनके पास किसी अन्य देश में जाने का विकल्प है पर वे ऐसा नहीं करेंगे.

कुछ अन्य समलैंगिकों का कहना है कि कई दूसरे मुस्लिम देशों में समलैंगिकों को अधिकार तो नहीं दिए गए लेकिन उन्हें तंग भी नहीं किया जाता है.

उनका कहना है कि पाकिस्तान में कई समलैंगिक हैं जो साथ रह रहे हैं लेकिन वे छिपकर जीवन बिताने के लिए मजबूर हैं, पर वे समय-समय पर आवाज़ा उठाते रहेंगे.

ग़ौरतलब है कि पिछले दिनों में संयुक्त राष्ट्र ने एक घोषणा पत्र में विभिन्न संस्थाओं और सदस्य देशों से अपील की थी कि समलैंगिकों के अधिकारों का ख़्याल रखा जाए.

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