अनिश्चय में हज़ारों तमिल विद्रोही

शरणार्थी
Image caption लड़ाई के दौरान हज़ारों की संख्या में विस्थापित हुए शरणार्थी

श्रीलंका में कई दशकों तक चला गृहयुद्ध ठीक एक साल पहले समाप्त हुआ लेकिन अब भी कोई दस हज़ार लोग तमिल टाइगर विद्रोहियों के लिए लड़ने के आरोप में हिरासत में बंद हैं.

वैसे तो विद्रोहियों को ये निर्देश रहता था कि अगर कभी समर्पण करने की स्थिति आ जाए तो वे पकड़े जाने की जगह सायनाइड के कैप्सूल चबाकर जान दे दें.

लेकिन लड़ाई के अंतिम क्षणों में कई विद्रोहियों की हिम्मत टूट गई. पहले पहल तो वे लाखों विस्थापित लोगों की भीड़ में जा मिले और विस्थापितों के लिए बनाए गए शिविरों में चले गए.

बाद में सरकार ने छानबीन कर संदिग्ध विद्रोहियों को अलग किया और उन्हें अतिसुरक्षित स्थानों पर हिरासत में रख दिया गया जहाँ ना तो अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियों, ना संयुक्त राष्ट्र और ना तमिल सांसदों की पहुँच है.

आपबीती

बीबीसी की तमिल सेवा ने वावुनिया में एक पूर्व विद्रोही से बात की जिसने नाम नहीं बताने की शर्त पर बताया कि उन्हें कोई निश्चित जानकारी नहीं दी जा रही.

पूर्व विद्रोही ने कहा,"हमें पता चला है कि सरकार ने कहा है कि हमें प्रशिक्षण दिया जाएगा, लेकिन कुछ हो तो नहीं रहा है. हमें नहीं पता हम कब बाहर जा पाएँगे. ये बेहद निराशा वाली स्थिति है.

फ़िलहाल वे हमारे घरवालों को हमसे मिलने की अनुमति दे रहे हैं. मगर मैं नहीं चाहता वे यहाँ आएँ क्योंकि इससे वे मुश्किल में पड़ सकते हैं."

हालाँकि कर्नल करूना के नाम से जाने जानेवाले पूर्व तमिल विद्रोही नेता और अब राजनेता विनायकमूर्ति मुरलीधरन का कहना है कि बंदियों के परिवार के लोगों को अपने संबंधियों से मिलने के कारण परेशान नहीं किया जाएगा.

घरवाले

Image caption लड़ाई के अंतिम समय में बड़ी संख्या में विद्रोहियों ने हथियार डाल दिए

पूर्व तमिल विद्रोहियों के घरवालों के लिए ये मुश्किल समय है. इनमें से कई स्वयं विस्थापित शिविरों में रह चुके हैं.

ऐसे ही एक शिविर में रही एक पूर्व तमिल विद्रोही की पत्नी मंजुला देवी बताती हैं,"मेरे पति तीन साल तक एलटीटीई में थे. पहले शिविर में मैं उनसे मिलती थी जिसके लिए हमें 10 मिनट दिया जाता था. पहले मैं उनके लिए खाना ले जाती थी. अब इसकी अनुमति नहीं है, तो मैं बिस्कुट ले जाती हूँ."

श्रीलंका सरकार का कहना है कि अभी तक कोई ढाई हज़ार पूर्व विद्रोहियों को फिर से बसाया जा चुका है.

लेकिन अभी कोई दस हज़ार से अधिक तमिल बंदी बनाकर रखे गए हैं.

माँग

मानवाधिकार संगठन पिछले कई महीनों से माँग कर रहे हैं कि श्रीलंका सरकार हिरासत में बंद लोगों का पूरा ब्यौरा पेश करे.

अंतरराष्ट्रीय संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल की अधिकारी डॉक्टर योलांडा फ़ोस्टर कहती हैं,"संदेह के आधार पर हज़ारों लोगों को रोककर रखना सही नहीं है. सरकार या तो ऐसे लोगों को अदालत में पेश करे या फिर उन्हें रिहा करे."

मगर कर्नल करूना का कहना है कि बाहर के देशों में तमिल विद्रोहियों के समर्थकों को देखते हुए ऐसा करना मुश्किल है.

वे कहते हैं,"पश्चिमी देशों में रहनेवाले तमिल विद्रोही समर्थक अभी तक एक समानांतर सरकार बनाने की कोशिश कर रहे हैं. श्रीलंका सरकार को लगता है कि अगर उनको रिहा किया गया तो ऐसे लोग फिर से संगठित हो सकते हैं."

लेकिन उन्होंने कहा कि भविष्य में सहायता एजेंसियों को इस क्षेत्र में जाने की अनुमति दी जा सकती है.

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