लखवी की ज़मानत याचिका ख़ारिज

मुंबई
Image caption पाकिस्तान में मुंबई हमलों का मुकदमा चल रहा है जिसमें लखवी अभियुक्त हैं.

पाकिस्तान की एक अदालत ने नवंबर 2008 में हुए मुंबई हमलों के मुक़दमे के अभियुक्त ज़की-उर-रहमान लखवी की ओर से दायर ज़मानत की याचिका ख़ारिज कर दी है.

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस इफ़्तिख़ार चौधरी की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यों की खंडपीठ ने गुरुवार को लखवी की याचिका पर फ़ैसला सुनाया.

लखवी के वकील ख़्वाजा सुल्तान ने अदालत में याचिका दायर कर आग्रह किया था कि अभियोजन पक्ष की ओर से अभियुक्त के ख़िलाफ अभी तक कोई सबूत पेश नहीं किए गए हैं.

उन्होंने आगे कहा कि जब भी अभियोजन पक्ष की ओर कोई सबूत पेश नहीं किया जाता है तो उसका लाभ अभियुक्त को मिलता है इसलिए उनके मुवव्किल को यह लाभ मिलना चाहिए.

ख़्वाजा सुल्तान ने अदालत से आग्रह किया कि लखवी को ज़मानत दी जाए क्योंकि अदालत पहले ही कह चुकी है कि इस मामले में मुंबई हमलों के दौरान गिरफ़्तार किए गए पाकिस्तानी नागरिक अजमल आमिर क़साब का भारतीय अधिकारियों को दिया बयान पाकिस्तान में इस्तेमाल नहीं हो सकता.

'बयान रिकॉर्ड हो रहे हैं'

ग़ौरतलब है कि अजमल आमिर क़साब ने मुंबई की एक जेल में भारतीय अधिकारियों को बयान दिया था जो पाकिस्तान सरकार को भेजा गया था.

लखवी के वकील ख़्वाजा सुल्तान की दलील सुनने के बाद अदालत ने कहा कि इस समय लखवी को ज़मानत नहीं दी जा सकती क्योंकि अभी मुक़दमा चल रहा है और लोगों के बयान भी रिकॉर्ड होने हैं.

अदालत ने आगे कहा कि जब तक इस मुक़दमे का परिणाम सामने नहीं आता तब तक किसी को भी ज़मानत नहीं दी जा सकती.

इससे पहले ज़की-उर-रहमान लखवी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अपील की थी कि अजमल क़साब का अदालती बयान उनके ख़िलाफ पाकिस्तान में रावलपिंडी की आतंकवाद निरोधक अदालत में चल रहे मुक़दमे में इस्तेमाल न किया जाए.

लखवी अदालतों में विभिन्न प्रकार की कई याचिकाएँ दायर कर चुके हैं जिनमें से अधिकतर ख़ारिज कर दी गई हैं.

'मुकदमा लाहौर में चलाएँ'

उन्होंने इस साल जनवरी में लाहौर हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके ख़िलाफ रावलपिंडी में चल रहे मुक़दमें को लाहौर में चलाया जाए क्योंकि इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग अदालत के फ़ैसले पर असर डाल सकता है.

अदालत ने उनकी याचिका ख़ारिज कर दी थी और उन्हें सुरक्षा प्रदान करने के लिए सरकार को आदेश दिया था.

ग़ौरतलब है कि रावलपिंडी की आतंकवाद निरोधक अदालत में ज़की-उर-रहमान लखवी, ज़रार शाह, अबू अल-क़ामा, हामिद अमीन सादिक़, शाहिद जमील रियाज़, जमील अहमद और यूनुस अंजुम के ख़िलाफ मुक़मदा चल रहा है.

अभियुक्तों पर आरोप है कि उन्होंने 2008 में हुए मुँबई हमलों के दारौन हमलावरों की मदद की और उन्हें प्रशिक्षण दिया था.

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