'क़दीर खान पर रोक-टोक न हो'

डॉक्टर अब्दुल क़दीर खान

पाकिस्तान की एक अदालत ने परमाणु वैज्ञानिक डॉक्टर अब्दुल क़दीर ख़ान की याचिका पर फ़ैसला सुनाते हुए कहा है कि वे एक आज़ाद नागरिक हैं और उनकी गतिविधियों पर प्रतिबंध नहीं होना चाहिए.

लाहौर हाई कोर्ट के न्यायधीश जस्टिस एजाज़ अहमद चौधरी ने सरकार को निर्देश दिया है कि डॉक्टर क़दीर ख़ान को सुरक्षा प्रदान की जाए क्योंकि उनकी सुरक्षा सरकार की ज़िम्मेदारी है.

क़दीर ख़ान के वकील अली ज़फ़र ने अदालत को बताया कि सरकार परिस्थितियों को ग़लत ढंग से पेश कर रही है और ग़ैर क़ानूनी तौर पर उनके मुवव्किल की गतिविधियों पर अवरोध लगाया हुआ है.

उन्होंने यह भी बताया कि अदालती फ़ैसले के बावजूद भी उनके मुवव्किल को कहीं जाने की अनुमति नहीं है.

'सम्मान नहीं मिला'

डॉक्टर अब्दुल क़दीर ख़ान ने अदालत में याचिका दायर की थी जिसमें उन्होंने कहा था कि पूर्व अटॉर्नी जनरल अनवर मंसूर ख़ान ने केंद्र सरकार की ओर से आश्वासन दिया था कि वे अब आज़ाद नागरिक हैं.

याचिका में आगे कहा गया था कि अनवर मंसूर ख़ान के पद से हटने के बाद सरकार ने अभी तक उनके आने-जाने पर प्रतिबंध लगाया हुआ है.

अदालत ने अपना फ़ैसला सुनाते हुए सरकार को आदेश दिया कि डॉक्टर क़दीर ख़ान को सुरक्षा प्रदान की जाए क्योंकि वे अब आज़ाद हैं और कहीं भी जा सकते हैं.

अदालत ने क़दीर ख़ान से कहा कि वे कहीं भी जाने से पहले सरकार को ज़रूर सूचित करें.

अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि सरकार और डॉक्टर क़दीर ख़ान के बीच सुरक्षा को लेकर एक समझौता हुआ था जिस पर अब अमल किया जाएगा.

अदालती फैसले के बाद डॉक्टर क़दीर ख़ान ने कुछ मीडिया चैनलों से बात करते हुए कहा कि अब देखना यह है कि सरकार इस पर कितना और कब अमल करती है.

क़दीर ख़ान ने कहा कि उन्होंने पाकिस्तान को परमाणु शक्ति दी लेकिन उनका सम्मान नहीं किया जा रहा है.

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