ढाका में राष्ट्रीय शोक की घोषणा

Image caption आग आसपास की कई इमारतों में भी फैल गई

बांग्लादेश की राजधानी ढाका में घनी आबादी वाली बस्ती में लगी आग में झुलसकर कम से कम 116 लोग मारे गए हैं.

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने अस्पताल में भर्ती लोगों से मुलाक़ात की है और देश में शनिवार को राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई है.

माना जा रहा है कि बिजली के एक ट्रांसफर्मर के जल जाने से यह आग लगी, एक गोदाम में रखे रसायनों की वजह से यह आग और भड़क उठी.

आग ने एक पाँच मंज़िला इमारत को अपनी चपेट में ले लिया जिसकी खिड़कियों में लोहे की जालियाँ लगे होने और बाहर निकलने का दूसरा कोई रास्ता न होने के कारण बड़ी संख्या में लोग झुलस गए.

इमारत से लाशों को निकाले जाने का काम अब भी चल रहा है, बड़ी संख्या में झुलसे हुए लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

पाँच मंज़िला इमारत की छत पर एक शादी की पार्टी चल रही थी जिसमें बाहर से बहुत सारे मेहमान भी आए थे, उनमें से भी कई लोग आग की चपेट में आ गए. दुल्हन की जान बच गई क्योंकि वह उस समय ब्यूटीपार्लर गई हुई थी.

आग की लपटें आसपास की इमारतों की तरफ़ भी बढ़ने लगीं जिससे भारी अफ़रातफ़री फैल गई.

कठिनाइयाँ

फायर ब्रिगेड का मुख्यालय उस इमारत से एक किलोमीटर से भी कम दूरी पर है लेकिन अग्निशमन और बचाव दस्तों को वहाँ तक पहुँचने में एक घंटे से अधिक समय लगा क्योंकि उन्होंने भीड़ भरी तंग गलियों से गुज़रना पड़ा.

Image caption स्थानीय लोगों ने घायलों को रिक्शे पर अस्पताल पहुँचाया

अग्निशमन विभाग के प्रमुख अबू नईम का कहना है कि इस इलाक़े की कम से कम सात इमारतों में आग लगी थी, अब आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया गया है.

समाचार एजेंसी एएफ़पी को उन्होंने बताया, "जिस इमारत में आग लगी है उसके भूतल पर रसायन बेचने वाली दुकानें थीं, जिसकी वजह से आग तेज़ी से फैल गई."

आग से प्रभावित एक इमारत में रहने वाली रहीमा बेग़म ने बताया, "मैं खाना खा रही थी कि मैंने एक धमाके की आवाज़ सुनी और फिर मैंने देखा कि दो-तीन घरों में आग लग गई है."

ढाका मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल दुर्घटना स्थल से सिर्फ़ 200 मीटर की दूरी पर है.

वहाँ के डॉक्टर इमरुल हसन ने बताया कि उन्होंने ख़ुद सड़क के किनारे 45 लाशें देखी हैं.

उनका कहना है, "जिन लोगों की मौत हुई है उनमें से ज़्यादातर लोग अधिक जले नहीं हैं लेकिन लगता है कि धुएँ में दम घुटने के कारण उनकी मौत हुई है."

इस घटना के बाद एक बार फिर अग्नि सुरक्षा नियमों की अनदेखी से जुड़े सवाल उठ रहे हैं, कहा जा रहा है कि अगर इमारत में 'फायर एक्ज़िट' यानी आग लगने की स्थिति में बाहर निकलने का रास्ता होता तो इतनी बड़ी संख्या में लोग नहीं मरते.

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