श्रीलंका के राष्ट्रपति की यात्रा का विरोध

वाइको
Image caption वाइको एलटीटीई के खुले समर्थक रहे हैं और इसे लेकर उनकी गिरफ़्तारी भी हो चुकी है

तमिलनाडु में श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे की भारत यात्रा का विरोध कर रहे सैकड़ों तमिल प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है जिनमें एमडीएमके नेता वाइको भी शामिल हैं.

हालाँकि शाम होते-होते सभी प्रदर्शनकारियों को छोड़ दिया गया

महिंदा राजपक्षे मंगलवार से भारत का तीन दिन का दौरा कर रहे हैं जिस दौरान वे भारतीय प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री और अन्य नेताओं से मिलेंगे.

श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों की हार और दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद से महिंदा राजपक्षे की ये पहली भारत यात्रा है.

श्रीलंका के तमिलों के साथ सहानुभूति रखनेवाली कुछ पार्टियाँ राजपक्षे के विरोध में चेन्नई में अलग-अलग स्थानों पर धरना और प्रदर्शन करना चाहते थे.

इस दौरान जिन नेताओं को गिरफ़्तार किया गया उनमें मरूमलार्ची द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (एमडीएमके) के संस्थापक वाइको, विरूतलाई चिरूतैगल कची (वीसीके) पार्टी के नेता तोल तिरूमावलवन, सीपीआई के प्रदेश सचिव डी पांडियन, तमिल नेशनल मूवमेंट के नेता पी नेदुमारन और अभिनेता सीमान और टी राजेंद्र भी शामिल हैं.

प्रदर्शनकारियों ने चेन्नई मे काले झंडे लेकर श्रीलंका के उप उच्चायुक्त के कार्यालय जाने की कोशिश की जब उनको हिरासत में लिया गया.

आरोप

तमिल विद्रोहियों के खुले समर्थक वाइको ने आरोप लगाया कि पिछले वर्ष श्रीलंका में सेना और एलटीटीई के बीच लड़ाई के अंतिम दौर में हज़ारों तमिल अल्पसंख्यकों को मार डाला गया.

वाइको ने कहा,"राजपक्षे अनेक निर्दोष तमिलों की मौत के ज़िम्मेदार हैं. उनके स्वागत के लिए लाल कालीन बिछाना तमिलों के घावों पर नमक छिड़कने के जैसा है".

वाइको ने साथ ही कहा कि निर्दोष तमिलों की मौत के लिए श्रीलंकाई राष्ट्रपति ज़िम्मेदार हैं और उनके ख़िलाफ़ अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में मुक़दमा चलाया जाना चाहिए.

चेन्नई में पट्टाली मक्कल काच्ची (पीएमके) के एक विधायक के नेतृत्व में ज़िलाधिकारी के दफ़्तर पर धरना देने जा रहे लगभग सौ पीएमके कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में लिया गया.

चेन्नई में कई स्थानों पर महिंदा राजपक्षे के पुतले भी जलाए गए.

चेन्नई के अतिरिक्त कोयंबटूर में भी विरोध प्रदर्शन हुए जहाँ रेलगा़ड़ियों को रोकने की कोशिशें की गईं.

भारत जाने से पहले महिंदा राजपक्षे ने देश में इस वर्ष हुए चुनाव के बाद पहली बार प्रमुख तमिल पार्टी से बात की.

कोलंबो स्थित बीबीसी संवाददाता का कहना है कि बताया जा रहा है कि बातचीत अच्छी रही हालाँकि उसमें कोई ऐसे प्रमुख विषयों पर चर्चा नहीं हुई.

राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार महिंदा राजपक्षे ने तमिल राजनेताओं से उनपर भरोसा करने के लिए कहा और कहा कि साथ काम कर के वे सभी समस्याओं को हल कर सकते हैं.

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