नागरिकों की हत्या नहीं की गई:राजपक्षे

श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने पिछले साल तमिल विद्रोहियों के ख़िलाफ़ संघर्ष में कथित युद्ध अपराधों के आरोपों की अंतरराष्ट्रीय जाँच की माँग का खंडन किया है.

पिछले साल तमिल टाइगर विद्रोहियों के ख़िलाफ़ सरकार की जीत के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह में राजपक्षे ने कहा, "सुरक्षाबलों ने नागरिकों की हत्या नहीं की थी. ये अभियान केवल आतंकवाद को ख़त्म करने के लिए चलाया गया था."

अभी एक दिन पहले ही संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था कि अगले कुछ दिनों में यूएन का विशेष पैनल बनाए जाने की उम्मीद है जो युद्ध के दौरान मानवाधिकारों से जुड़े मामलों की जाँच करेगा.

श्रीलंका में पिछले कई दशकों से चला आ रहा युद्ध मई 2009 में तमिल विद्रोहियों पर जीत के साथ समाप्त हुआ था.

मई महीने में हो रही भारी बारिश की वजह से समारोह को एक महीने के लिए स्थगित कर दिया गया था.

शुक्रवार को कोलंबो में हुए रंगारंग समारोह में राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया.

'परेड हित में नहीं'

समारोह में सैन्य बलों के हर रेजिमेंट और डिविज़न से लोगों की भारी भीड़ जुटी. बड़ी संख्या में सेना की उन गाड़ियों और शस्त्रों का प्रदर्शन किया गया जिन्होंने तमिल टाइगरों के खिलाफ़ जीत को संभव बनाया.

समारोह स्थल की नाकेबंदी कर दी गई थी और लोगों को ये कार्यक्रम टीवी पर ही देखना पड़ा.

विद्रोहियों के ख़िलाफ़ युद्ध के दौरान साढ़े तीन साल तक सेना अध्यक्ष रहे जनरल फोनसेका समारोह में मौजूद नहीं थे.

राष्ट्रपति चुनाव में खड़े होने के बाद से फ़रवरी से ही वे हिरासत में हैं. उन्हें नौसेना के मुख्यालय में रखा गया है जो समारोह स्थल से एक किलोमीटर की दूरी पर है.

जनरल फोंसेका को गुरुवार को थोड़ी देर के लिए बाहर आने की अनुमति दी गई थी ताकि वे अपनी सास के अंतिम संस्कार में शामिल हो सकें. रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने कहा है कि विजयी परेड सेना के हित में नहीं है.

श्रीलंका सरकार का कहना है कि यह समारोह ‘दुनिया के सबसे खतरनाक आंतकी समूह’ पर जीत को दर्शाता है.

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