बातचीत जारी रखने पर सहमति

  • 24 जून 2010
निरुपमा राव और सलमान बशीर
Image caption दोनों देशों ने तय किया है कि आगे भी बातचीत जारी रखी जाएगी.

भारत और पाकिस्तान के विदेश सचिवों ने दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली और बातचीत की प्रक्रिया जारी रखने पर सहमति जताई है.

पाकिस्तान के विदेश सचिव सलमान बशीर और भारत की विदेश सचिव निरुपमा राव ने इस्लामाबाद में एक साझा पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि दोनों देशों के नेतृत्व ने उन्हें इस संदर्भ में जो अधिकार दिया था उस के मुताबिक फैसला लिया गया है कि बातचीत ही दोनों देशों के लिए एक मात्र विकल्प है.

पाकिस्तान के विदेश सचिव सलमान बशीर ने पत्रकारों को बताया, “विश्वास की बहाली और संबधों को मज़बूत करने की दिशा में हम दोनों की बैठक बहुत ही उपयोगी और रचनात्मक रही और हम समझते हैं कि बातचीत की प्रक्रिया जारी रहनी चाहिए.”

उन्होंने आगे कहा, “हमने गंभीर रुप से सभी मुद्दों पर विचार विमर्श किया और हमने 15 जुलाई को होने वाली विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए तैयारी की है.”

सलमान बशीर के मुताबिक दोनों विदेश मंत्री सार्क शिखर सम्मेलन के अवसर पर भूटान से मिली प्रेरणा के तहत शांति प्रक्रिया शुरु करेंगे.

भारत की विदेश सचिव निरुपमा राव ने पत्रकारों को बताया, “हमने इस बैठक में एक दूसरे की परिस्थितियों को समझा है और सभी मुद्दों के हल के लिए वचनबद्ध हैं.”

उन्होंने आगे कहा कि भूटान में हुई दोनों देशों के नेतृत्व की मुलाक़ात ने बातचीत की प्रक्रिया को जारी रखने के लिए एक रास्ता बनाया और उन्होंने इस को आगे बढ़ाया है.

निरुपमा राव ने बताया, “इस बैठक में हमने दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी को दूर करने की दिशा में कई उपायों पर विचार किया है और इस संदर्भ में दोनों विदेश मंत्री महत्वपूर्ण क़दम उठाएँगे.”

उससे पहले विदेश मंत्रालय में दोनों देशों के विदेश सचिवों की बैठक हुई जिसमें दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया.

मुंबई में नवंबर 2008 में हुए आतंकवादी हमलों के बाद भारत के किसी वरिष्ठ अधिकारी की यह पहली पाकिस्तान यात्रा है.

विदेश मंत्रालय के अनुसार इस बैठक में दोनों देशों के बीच सभी समस्याओँ पर बात हुई और 15 जुलाई में होने वाली विदेश मंत्रियों की मुलाक़ात के लिए एजेंडा तय किया गया है.

ग़ौरतलब है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और प्रधानमंत्री यूसुफ रज़ा गिलानी ने मार्च के अंत में सार्क शिखर सम्मेलन के दौरान भूटान में मुलाक़ात की थी और विश्वास बहाली पर सहमति जताई थी.

बाद में भूटान से लौटते ही पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा था कि सार्क शिखर सम्मेलन के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच संपर्क की बहाली की दिशा में आशा से बढ़ कर प्रगति हुई थी.

भारत और पाकिस्तान के विदेश सचिवों की यह बैठक इस मुलाक़ात की एक कड़ी थी और दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली पर मुख्य रुप से बात हुई.

माना जा रहा है कि भारत इस बैठक में आतंकवाद और बढ़ते हुए चरमपंथ का मुद्दा उठाया और लश्करे लैबा और जैश ए मोहम्मद जैसी जेहादी गुटों के ख़िलाफ कार्रवाई केलिए पाकिस्तान पर भी दबाव डाला.

भारत सरकार को चिंता है कि जेहादी गुट फिर से सक्रिय हो रहे हैं जिसकी पुष्टि पाकिस्तानी अधिकारियों ने भी कर दी है.

मंगलवार को पाकिस्तान की ख़ुफिया एजेंसियों ने गृह मंत्रालय को एक रिपोर्ट दी जिसमें कहा गया है कि पंजाब प्रांत में 17 प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन धार्मिक सभाओं अथवा कल्याणकारी कार्यों के नाम पर चंदा वसूल रहे हैं.

मुंबई हमला करने के आरोप में गिरफ्तार ज़की-उर-रहमान लखवी सहित 6 अभियुक्तों को न्याय के कटघरे तक पहुँचाने केलिए भी इस बैठक में भारत का ज़ोर रहा साथ ही जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफिज़ सईद पर भी बात हुई.

भारत सरकार हाफिज़ सईद को मुंबई हमलों का मुख्य साज़िशकर्ता मानती है जो पाकिस्तान में एक आज़ाद नागरिक के हैसियत से रह रहे हैं.

ख़बरें हैं कि भारत की विदेश सचिव निरुपमा राव पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी से भी मुलाक़ात करेंगी लेकिन औपचारिक रुप से इस की पुष्टि नहीं हो सकी है.

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