'तालिबान से अफ़गान महिलाओं को ख़तरा'

Image caption सौंदर्य प्रसाधन खरीद रहीं अफ़गान महिलाएं.

एक मानवाधिकार संस्था ने कहा है कि अफ़गानिस्तान की सरकार यदि तालिबान से समझौता करती है तो उससे महिलाओं के अधिकारों को चोट पहुंचेगी.

अमरीका स्थित संगठन ह्यूमैन राइट्स वाच का कहना है कि अफ़गानिस्तान के जिन इलाकों में तालिबान की ताक़त बढ़ी है वहां महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा, जान की धमकी और दबाव की वारदातों में तेज़ी आई है.

तालिबान के पतन के बाद से अफ़गानिस्तान के कई पिछड़े इलाकों में भी महिलाओं की स्थिति में सुधार देखा गया.

देश के दक्षिणी इलाकों में महिलाएं स्कूलों में, नागरिक प्रशासन में और स्वास्थ्य सेवाओं में काम करने लगीं.

लेकिन उन्हीं इलाकों में अब वो डर और धमकियों के माहौल में हैं.

इन महिलाओं को धमकी भरी चिठ्ठियां, जिन्हें रात की चिठ्ठी का नाम दिया जाता है, भेजी जाती हैं और उनसे काम छोड़ने को कहा जाता है.

एक मामला ऐसा भी हुआ जिसमें एक महिला को ऐसे व्यक्ति की ओर से चिठ्ठी मिली जो तालिबान होने का दावा करता था और उसमें भी उससे काम छोड़ने को कहा गया था.

Image caption रिपोर्ट का कहना है जहां तालिबान की ताक़त बढ़ रही है वहां महिलाओं की आज़ादी छिन रही है.

एक सहायता संस्था के लिए काम कर रही इस महिला को दफ़्तर से निकलते वक्त गोली मार दी गई और उसकी मौत हो गई.

उसके क़ातिल को कोई पता नहीं चल पाया है.

संगठन का कहना है कि वैसे तो विदेशी कंपनियों या सरकार के लिए काम कर रहे पुरूषों को भी धमकियां मिल रही हैं लेकिन महिलाओं को ख़ास तौर पर निशाना बनाया जा रहा है.

इस रिपोर्ट के लिए मानवाधिकार संगठन ने 90 महिलाओं का इंटरव्यू किया.

अफ़गानिस्तान की सरकार और उनके अतंरराष्ट्रीय सहयोगियों ने कहा है कि शांति के लिए चरमपंथियों से बात करना ज़रूरी होगा.

राष्ट्रपति करज़ई ने कहा है कि चरमपंथियों को हिंसा छोड़नी होगी और अफ़गानिस्तान के संविधान को अपनाना होगा.

मानवाधिकार संगठन का कहना है कि सरकार किसी भी समझौते में ये भी सुनिश्चित करे कि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा की जाएगी.

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