श्रीलंकाई मंत्री भूख हड़ताल पर

विमल वीरावंसा
Image caption मंत्री विमल वीरावंसा ने संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के सामने आमरण अनशन शुरू किया

श्रीलंका के एक मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र से कथित युद्ध अपराधों की जाँच बंद करवाने की माँग को लेकर कोलंबो स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के बाहर भूख हड़ताल शुरू कर दी है.

श्रीलंकाई आवास मंत्री विमल वीरावंसा पिछले दो दिनों से संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के बाहर अपने समर्थकों के साथ प्रदर्शन कर रहे थे.

कोलंबो स्थित बीबीसी संवाददाता चार्ल्स हाविलैंड का कहना है कि मंत्री वीरावंसा संयुक्त राष्ट्र के मुख्य दफ़्तर के बाहर एक चटाई पर अकेले बैठे हुए हैं.

कई बौद्ध भिक्षु भी उस जगह मौजूद हैं और उन्होंने प्रदर्शनकारियों को आशीर्वाद दिया है.

वहाँ एक पेड़ पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून की तस्वीर टाँक दी गई है जिसके साथ कई अपमानजनक पंक्तियाँ लिखी हुई हैं.

बान की मून की तस्वीर के साथ संयुक्त राष्ट्र के तीन और वरिष्ठ अधिकारियों की तस्वीरें लगाई गई हैं जो बान की मून को सलाह देनेवाली एक समिति के सदस्य हैं.

उनकी तस्वीरों के आगे लिखा है – तीन मूर्ख.

मंत्री विमल वीरावंसा ने कहा है,"मैं आमरण अनशन शुरू कर रहा हूँ. मैं इसे तभी बंद करूँगा जब युद्ध अपराध के आरोप वापस ले लिए जाएँगे और संयुक्त राष्ट्र के जाँच दल को भंग किया जाएगा."

गतिरोध

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि विरोध के कारण संयुक्त राष्ट्र को श्रीलंका में काम करने में बहुत मुश्किलें आ रही हैं और उनके काफ़ी कम कर्मचारी काम पर जा पा रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र ने कोलंबो में अपने परिसर में प्रदर्शन होने पर सख़्त आपत्ति जताई है.

श्रीलंका सरकार ने कहा है कि वो इस बात का ख़याल रखेगी कि संयुक्त राष्ट्र कर्मचारियों को दफ़्तर आने-जाने में परेशानी ना हो, लेकिन बीबीसी संवाददाता का कहना है कि सरकार छिपे तौर पर प्रदर्शनों का समर्थन कर रही है.

श्रीलंका सरकार ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव को परामर्श देने के लिए गठित दल के तीनों सदस्यों को वीज़ा देने से भी मना कर दिया है और कहा है कि इस जाँच से उनकी संप्रभुता को धक्का लगेगा.

श्रीलंका में पिछले साल लड़ाई के अंतिम दौर में सेना और विद्रोहियों, दोनों पर बड़े पैमाने पर युद्ध अपराध करने का आरोप लगता रहा है.

संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि लड़ाई के अंतिम पाँच महीनों में लगभग सात हज़ार नागरिक मारे गए थे.

संगठन ने पिछले साल जाँच दल के गठन की घोषणा करते हुए कहा था कि ये जाँच दल चार महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट महासचिव को सौंपेगा.

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