अफ़गानी अंगूर दिल्ली में पाक के रास्ते

Image caption अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन की मौजूदगी में अफ़गानिस्तान और पाकिस्तान ने इस समझौते पर दस्तखत किया.

अफ़गानिस्तान और पाकिस्तान के बीच एक अहम व्यापार समझौता हुआ है जिसके तहत अफ़गान ट्रक पाकिस्तान के रास्ते भारतीय बाज़ारों में सामान ला सकेंगे.

भौगोलिक रूप से कई देशों की सीमाओं के बीच में क़ैद अफ़गानिस्तान को इस समझौते के तहत पाकिस्तानी बंदरगाहों के इस्तेमाल की भी छूट होगी जिससे वो दुनिया के अन्य देशों के साथ व्यापार कर सकें.

पाकिस्तान के दौरे पर गईं अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन की मौजूदगी में हुए इस समझौते को अफ़गानिस्तान के वित्त मंत्री ओमर ज़खिलवाल ने ‘ऐतिहासिक’ बताया है.

इस समझौते के लिए कई सालों से कोशिशें चल रही थीं और यदि ये लागू हो जाता है तो अफ़गानिस्तान और पाकिस्तान के रिश्तों को बेहतर करने की ओर ये एक बड़ा कदम होगा.

फ़िलहाल इस पर दस्तखत तो हो गए हैं लेकिन इसे दोनों देशों में संसदीय मंज़ूरी की ज़रूरत होगी.

इस समझौते से अफ़गानिस्तान के व्यापारी अपना सामान वाघा सीमा के ज़रिए भारतीय बाज़ार तक ले जा सकेंगे.

अफ़गानिस्तान के वित्त मंत्री ओमर ज़खिलवाल का कहना था, "वाघा के रास्ते हमारा सामान तो भारत पहुंच सकेगा. लेकिन भारत और पाकिस्तान के बीच जो परेशानियां हैं उस वजह से भारत का सामान अफ़गानिस्तान नहीं आ सकेगा. लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि इस समस्या का भी हल निकलेगा."

बीबीसी संवाददाता लिस डूसेट का कहना है कि इस समझौते से भारतीय सामान अफ़गानिस्तान जा सकेगा इसकी उम्मीद कम ही नज़र आती है क्योंकि भारत और पाकिस्तान के बीच आपसी विश्वास की भारी कमी है.

अमरीकी कोशिश

लेकिन इन सब जटिलताओं के बावजूद अमरीका ने इस समझौते का स्वागत किया है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस्लामाबाद में हिलेरी क्लिंटन की मौजूदगी इस समझौते में सहायक साबित हुई है.

समझौते पर हस्ताक्षर के बाद अफ़गानिस्तान और पाकिस्तान के लिए अमरीका के विशेष दूत रिचर्ड हॉलब्रूक का कहना था, “इस्लामाबाद और काबुल को एक दूसरे के करीब लाना इस (ओबामा) प्रशासन की प्राथमिकता रही है और ये समझौता उस दिशा में एक बड़ा कदम है.”

अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि ये समझौता तभी हो पाया जब पाकिस्तानी सेना इस रास्ते से व्यापार के लिए राज़ी हो पाई. उन्हें डर है कि इस रास्ते का इस्तेमाल हथियारों की तस्करी के लिए भी हो सकता है.

माना जा रहा है कि अफ़गानिस्तान में आर्थिक गतिविधियों के मज़बूत होने से करज़ई सरकार को तालिबान चरमपंथियों का मुक़ाबला करने में मदद मिलेगी.

Image caption इस समझौते से अफ़गानिस्तान में आर्थिक गतिविधियों में तेज़ी आने की उम्मीद है.

अफ़गानिस्तान के व्यापार का 50 प्रतिशत उसके पांच पड़ोसी देशों, पाकिस्तान, ईरान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज़्बेकिस्तान के साथ होता है.

पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान का व्यापार लगभग एक अरब डॉलर का है लेकिन विश्व बैंक के अनुसार ये व्यापार मुख्य रूप से पाकिस्तान को ही फ़ायदा पहुंचाता है क्योंकि अफ़गानिस्तान पाकिस्तान को बहुत कम निर्यात करता है.

अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि इस समझौते से दोनों देशों से सामान लानेजाने की कीमतों में 50 प्रतिशत की कमी आएगी, आयात सस्ते होंगे, निर्यात आसान होगा और सीमा के दोनों ओर रोज़गार में बढ़ोतरी होगी.

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