'भारतीय हितों की रक्षा होगी'

Image caption फ़रवरी में काबुल में एक गेस्ट हाउस पर हमला हुआ जहां भारतीय नागरिक ठहरते थे.

अफ़गानिस्तान के राष्ट्रपति ने एक ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के लिए पहुंचे भारतीय विदेश मंत्री को आश्वस्त किया है कि भारत के हितों और वहां काम कर रहे भारतीय नागरिकों की रक्षा की जाएगी.

मंगलवार को अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन समेत दुनिया के 70 देशों के प्रतिनिधि काबुल में अफ़गानिस्तान के भविष्य पर होनेवाले सम्मेलन में भाग ले रहे हैं.

ये सम्मेलन पहले के दानकर्ता देशों के सम्मेलन से अलग है क्योंकि इसमें अफ़गानिस्तान के लिए और पैसे देने की बात नहीं होनी है.

इस सम्मेलन में राष्ट्रपति करज़ई अफ़गानिस्तान के लिए मिल रहे अंतरराष्ट्रीय अनुदान को उनकी सरकार के माध्यम से दिए जाने का अनुरोध करेंगे.

लेकिन उससे भी महत्वपूर्ण है तालिबान के साथ समझौते की बात और अगले साल से अंतरराष्ट्रीय सैनिकों की वापसी की शुरूआत की रूपरेखा पर बहस.

भारत की आशंका

Image caption काबुल मे कई दशकों के बाद इतना बड़ा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन हो रहा है.

भारत के लिए ये दोनों ही बातें बेहद अहम हैं क्योंकि उन्हें आशंका है कि तालिबान के साथ कोई भी समझौता उनके हितों के लिए ख़तरनाक है.

पाकिस्तान और करज़ई सरकार दोनों ही तालिबान के साथ समझौते के हक़ में हैं और अमरीका भी उन तालिबान से बात करना चाहता है जो हिंसा छोड़ने को तैयार हों.

भारत अफ़गानिस्तान के पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और उसे आशंका है कि यदि तालिबान की वापसी होती है तो उनके लिए वहां काम करना मुश्किल होगा.

भारतीय विदेश मंत्री एस एम कृष्णा ने इन सब मामलों पर राष्ट्रपति हामिद करज़ई से 45 मिनट तक बात की है और अफ़गानिस्तान में शांति बहाल करने में पूर्ण सहयोग का वादा किया है.

कृष्णा अफ़गानिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रंगीन ददफ़र स्पांता से भी मिले.

समाचार एजेंसी पीटीआई का कहना है कि स्पांता ने भारत को आश्वस्त किया है कि अफ़गान सरकार उन “भारतीय मेहमानों” की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगी जो उनके देश के विकास निर्माण में लगे हुए हैं.

पिछले कुछ समय में अफ़गानिस्तान में भारतीय नागरिकों और दूतावास को तालिबान ने कई बार निशाना बनाया है.

लेकिन भारत कहता रहा है कि इन हमलों के बावजूद वो वहां विकास कार्य से जुड़ा रहेगा.

अफ़गानिस्तान में भारत की बढ़ती मौजूदगी पर पाकिस्तान ने अक्सर चिंता प्रकट की है और उनका आरोप है कि भारत वहां रहकर पाकिस्तान को कमज़ोर करने की कोशिशों में जुटा है.

भारत इन आरोपों से इंकार करता रहा है.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरेशी भी काबुल पहुंच रहे हैं लेकिन इस बात की संभावना बेहद कम है कि एस एम कृष्णा और उनकी अलग से मुलाक़ात होगी.

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