अच्छे प्रशासन का लक्ष्य अधूराः करज़ई

काबुल
Image caption काबुल में हो रहे सम्मेलन का महत्व इस बात के लिए है कि अभी भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय को उसकी फ़िक्र है.

अफ़गानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने कहा है कि अफ़गानिस्तान 2014 तक अपनी सुरक्षा स्वयं सुनिश्चित करना चाहता है.

अफ़गानिस्तान के भविष्य को लेकर हो रहे इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को शुरु करते हुए करज़ई ने कहा है कि अफ़गानिस्तान और उसको समर्थन दे रहे देशों के समक्ष एक ख़तरनाक दुश्मन है. उन्होंने माना कि अफ़गानिस्तान अभी तक बेहतर प्रशासन का लक्ष्य पूरा करने में असफल रहा है.

इसी सम्मेलन को संबोधित करते हुए अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिटंन ने कहा कि अमरीका लंबे समय तक अफ़गानिस्तान को समर्थन देने के लिए तैयार है.

उन्होंने कहा कि अफ़गानिस्तान में अमरीकी सैन्य प्रतिबद्धता के साथ ही वहां आर्थिक विकास के लिए भी अभूतपूर्व उपाय किए जा रहे हैं.

इस सम्मेलन में अफ़गानिस्तान में भ्रष्टाचार, सुरक्षा, विकास और प्रशासन के मुद्दों पर चर्चा होनी है जिसमें शामिल होने के लिए 70 देशों के प्रतिनिधि आए हैं.

अफ़गानिस्तान की राजधानी क़ाबुल में क़रीब तीन दशकों के बाद एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन हो रहा है.

काबुल सम्मेलन के बाद जनवरी महीने में लंदन में दाता देशों की एक बैठक होगी. काबुल में पिछले तीन दशकों में पहली बार इतनी बड़ी अंतरराष्ट्रीय बैठक हो रही है.

सम्मेलन से पहले काबुल में सुरक्षा व्यवस्था अत्यंत कड़ी कर दी गई थी और सोमवार से ही चेकिंग शुरु हो गई थी. पिछले कुछ महीनों में अफ़गानिस्तान और ख़ासकर काबुल में कई आत्मघाती हमले हुए हैं.

पिछले महीने काबुल में एक राष्ट्रीय शांति जिरगा का आयोजन हुआ था.जिरगा का उदघाटन राष्ट्रपति करज़ई कर रहे थे और इसी दौरान मिसाईल हमले हुए थे. इस घटना के बाद देश के खुफ़िया विभाग के प्रमुख गृह मंत्री ने इस्तीफ़ा दे दिया था.

सुरक्षा बनाम विकास

गृह मंत्रालय के प्रवक्ता जेमाराइ बशरे ने इसी हफ़्ते रायटर्स संवाद समिति से कहा था, ‘‘हम सौ प्रतिशत तैयार हैं लेकिन हम ये नहीं कह सकते कि सबकुछ योजनाबद्ध तरीके से हो जाएगा.’’

हालांकि यह दाता सम्मेलन नहीं है लेकिन फिर भी कई देशों ने अफ़गानिस्तान के लिए और मदद की घोषणा की है. ब्रिटेन ने कहा है कि वो अफ़गानिस्तान में परियोजनाओं पर 40 प्रतिशत व्यय बढ़ाएगा.

अफ़गानिस्तान को 2001 से लेकर अब तक क़रीब 36 अरब डॉलर यानी प्रति व्यक्ति 1200 डॉलर की सहायता मिली है. बीबीसी के अंतरराष्ट्रीय विकास रिपोर्टर डेविड लॉयन का कहना है कि इस सहायता के कम ही हिस्से का प्रभाव पडा है.

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