तालिबान ने माना ड्रोन हमलों से असर पड़ा

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Image caption जनवरी 2009 से हुए ड्रोन हमलों में पाकिस्तान में 700 से अधिक लोग मारे गए

पाकिस्तान में तालिबान ने माना है कि क़बायली इलाक़ों में अमरीकी ड्रोन हमलों के कारण उनकी गतिविधियों पर असर पड़ा है और उन्हें अपने तौर-तरीके बदलने पड़े हैं.

बीबीसी की उर्दू सेवा की विशेष जाँच से पता चला है कि पाकिस्तान में जनवरी 2008 से जनवरी 2009 के बीच 25 ड्रोन हमले हुए जबकि अमरीका में राष्ट्रपति बराक ओबामा के पद संभालने के बाद जनवरी 2009 से जून 2010 तक 87 ड्रोन हमले हुए हैं.

राष्ट्रपति ओबामा के कार्यकाल में हुए इन हमलों में 700 के अधिक लोग मारे गए हैं. पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के कार्यकाल के दौरान ये आंकड़ा 200 से कुछ कम था.

ग्राफ़िक्स:पाकिस्तान में जनवरी 2009 से जून 2010 तक हुए ड्रोन और चरमपंथी हमले

'अब भी हमले करने की क्षमता'

इस्लामाबाद स्थित बीबीसी उर्दू सेवा के संवाददाता हारून रशीद ने बताया है, "तालिबान ने बीबीसी को फ़ोन पर बताया कि ड्रोन हमलों के वजह से तालिबान बड़ी संख्या में एकत्र नहीं होते हैं, उनके नेताओं ने मोबाइन फ़ोन का इस्तेमाल बंद कर दिया है और वे कभी भी एक ही जगह पर ज़्यादा देर नहीं रहते."

लेकिन उत्तरी वज़ीरिस्तान के क़बायली इलाक़े के एक तालिबान नेता ने बीबीसी को बताया कि इन ड्रोन हमलों के कारण हुए नुक़सान से बावजूद वे अपने लक्ष्य को पाने के बारे में दृढ़ रहेंगे.

उनका कहना था कि तालिबान का लक्ष्य अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान में अमरीकी सेनाओं को हराना है.

हारून रशीद का कहना है कि क़बायली इलाक़ों में ड्रोन हमलों के असर का आकलन कर पाना मुश्किल है लेकिन माना जाता है कि वहाँ विद्रोहियों की सप्लाई लाइनें, संचार व्यवस्था प्रभावित हुई हैं और उनके नेताओं को भूमिगत होना पड़ा है.

विशेषज्ञों का मानना है कि चरमपंथी ड्रोन हमलों से प्रभावित तो हुए हैं लेकिन अब भी उनमें ये क्षमता है कि वे पाकिस्तान में कहीं भी हमला कर सकते हैं.

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