बांग्लादेश नरसंहार में पहला वारंट जारी

बांग्लादेश ट्राइब्यूनल
Image caption इस साल मार्च में युद्ध अपराध ट्राइब्यूनल का गठन हुआ था.

बांग्लादेश में हुए सामूहिक नरसंहार के मामले में पहली बार गिरफ़्तारी के वारंट जारी हुए हैं. ये वारंट बांग्लादेश की सबसे बड़ी इस्लामिक पार्टी, जमात-ए-इस्लामी के चार वरिष्ठ नेताओं के ख़िलाफ़ हैं.

बांग्लादेश की अवामी लीग की सरकार ने इस साल युद्ध अपराध ट्राइब्यूनल का गठन किया था. ये ट्राइब्यूनल साल 1971 में हुए सामूहिक नरसंहार की जांच कर रहा है. क़रीब चार महीने बाद पहले वारंट जारी हुए हैं जो ग़ैर ज़मानती हैं.

अदालत के एक वरिष्ठ अधिकारी मोहम्मद शाहीनूर इस्लाम ने बीबीसी संवाददाता को बताया कि ग़ैर ज़मानती वारंट जमात-ए-इस्लामी के चार वरिष्ठ नेताओं के ख़िलाफ़ जारी हुए हैं.

इनके ख़िलाफ़ युद्ध के दौरान हत्या, बलात्कार और मानवता के ख़िलाफ़ अपराधों को अंजाम देने के आरोप हैं.

इन चारों अभियुक्तों को पिछले महीने कुछ दूसरे मामलों के आरोप में हिरासत में लिया गया था.

सामूहिक नरसंहार

वर्ष 1971 में स्वतंत्र राष्ट्र के लिए पाकिस्तान से युद्ध में बांग्लादेश में सामूहिक नरसंहार हुआ था.

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 30 लाख लोगों के मरने और हज़ारों महिलाओं के बलात्कार की बात कही जाती है.

ये तब हुआ था जब पाकिस्तानी सेना बांग्लादेश को आज़ाद देश बनने से रोक रही थी. उस वक़्त बांग्लादेश पाकिस्तान का पूर्वी हिस्सा हुआ करता था.

लगभग 39 साल बाद बांग्लादेश की अवामी लीग की सरकार ने उन बांग्लादेशियों की जांच के लिए युद्ध अपराध ट्राइब्यूनल बनाया जिनपर आरोप है कि उन्होंने उस वक़्त पाकिस्तानी सेनाओं का साथ दिया था और आम लोगों की हत्या की थी.

हालांकि इस्लामिस्ट पार्टी के नेताओं ने इन सभी आरोपों को ख़ारिज किया है. उनका आरोप है कि सरकार युद्ध अपराध के आरोप लगाकर उनकी गतिविधियों को रोकने की कोशिश कर रही है.

ट्राइब्यूनल की अगली सुनवाई दो अगस्त को होगी.

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