ईरान पर पाबंदी और सख़्त

  • 26 जुलाई 2010
ईरान
Image caption ईरान का कहना है कि उसकाप रमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण कार्रवाई के लिए है

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के उद्देश्य से यूरोपीय संघ ने उस पर कड़ी पाबंदियाँ लगाई हैं.

ईरान के विदेश व्यापार, वित्तीय सेवाओं और तेल-गैस के क्षेत्र में ये पाबंदियाँ लगाई गई हैं.

अधिकारियों का कहना था, "किसी देश के ख़िलाफ़ यूरोपीय संघ की पाबंदियों में ये सबसे दूरमागी असर वाली पाबंदियाँ हैं."

पिछले महीने अमरीका ने ईरान पर लगे प्रतिबंधों को और सख़्त कर दिया था.

अमरीका और उसके सहयोगी देश ईरान पर परमाणु हथियार कार्यक्रम चलाने का आरोप लगाते रहे हैं, जबकि ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है.

पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चौथे दौर का प्रतिबंध लगाया. ये प्रतिबंध सीधे तौर पर ईरान के 'रिवॉल्यूशनरी गार्डस' के ख़िलाफ़ है.

रिवॉल्यूशनरी गार्डस के नियंत्रण में ईरानी अर्थव्यवस्था का एक तिहाई हिस्सा है जिसमें कई उद्योग शामिल हैं.

'ईरान कार्रवाई करेगा'

प्राकृतिक गैस के उत्पादन और परिशोधन के लिए जरूरी तकनीक के आयात पर यूरोपीय संघ ने पाबंदी लगा दी है.

ईरानी अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों में नए निवेश पर भी रोक लगा दी गई है यानी अब यूरोपीय देशों की कंपनियाँ ईरान में निवेश नहीं कर सकेंगी.

यूरोपीय संघ में कारोबार कर रही ईरानी बैकों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी. साथ ही 40 से ज्यादा लोगों और 50 से ज्यादा कंपनियों को 'ब्लैकलिस्ट' किया जाएगा.

रविवार को ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने पाबंदियों के ख़िलाफ़ यूरोपीय संघ को चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि संघ को इस क़दम के लिए पछताना पडे़गा.

अहमदीनेज़ाद वे कहा कि जिन्होंने भी इस तरह के प्रतिबंध लगाए हैं 'उन्हें जानना चाहिए कि ईरान तेज़ी से कार्रवाई करेगा.'

बीबीसी के यूरोप संपादक गेविन हेविट का कहना है कि इस बात के संकेत भी है कि ईरान सितंबर तक बातचीत के लिए राजी हो जाए.

संबंधित समाचार