लीक रिपोर्ट में काबुल हमले का भी ज़िक्र

काबुल धमाका (फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption काबुल स्थित भारतीय दूतावास के सामने वर्ष 2008 में हुए हमले में 52 लोग मारे गए थे

अफ़गानिस्तान के बारे में लीक हुए अमरीकी सैन्य दस्तावेज़ों में काबुल स्थित भारतीय दूतावास पर हमले का भी ज़िक्र है.

इसमें कहा गया है, "तालिबान काबुल स्थित भारतीय दूतावास पर हमला करने की योजना बना रहे हैं. इस काम के लिए उन्होनें एक इंजिनीयर को चुना है जो अफगान नेशनल आर्मी की एक चुराई गाड़ी और चुराया हुआ यूनिफ़ार्म पहनकर यह काम करेगा. यह शख्स ईरानी लहजे में दरी बोलता है और जैसा कहा जा रहा है वह एक कंपनी का मालिक है"

रिपोर्ट में कहा गया है कि दूतावास पर हमला करने वालों को भागने देने का मौक़ा मुहैया करवाने के लिए एक दल अफ़ग़ानिस्तान के गृह मंत्रालय पर भी हमला करेगा.

साथ ही रिपोर्ट यह भी कहती है कि इस पूरे काम का बजट 120 हज़ार डॉलर है. जिसका मुख्य उद्देश्य यह साबित करना था कि तालिबान काबुल में कहीं भी हमला कर सकते हैं.

ग़ौरतलब है कि भारत के काबुल दूतावास के सामने 7 जुलाई 2008 को ज़बरदस्त धमाका हुआ था जिसमें दूतावास के कई मुख्य अधिकारियों समेत 52 लोग मारे गए थे.

वेबसाइट पर कहा गया है कि हमले के एक हफ्ते पहले ही पोलैंड की गुप्तचर एजेंसी ने इसकी सूचना दे दी थी.

हमले का आईएसआई से संबंध

कुछ भारतीय समाचार पत्रों ने कहा है कि यह बताना मुश्किल है कि अमरीका ने इस संभावित हमले की सूचना भारत को पहले से दी थी या नहीं.

लेकिन अंग्रेजी समाचार पत्र हिन्दू ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि भारतीय अधिकारियों को इसकी सूचना थी और उन्होंने दूतावास को अलर्ट कर दिया था जिसने सुरक्षा के कदम भी उठाए थे जिसकी वजह से जान माल का कम नुकसान हुआ.

हालांकि रिपोर्ट में इस हमले में सीधे तौर पाकिस्तान के किसी 'लिंक' की बात नहीं की गई है लेकिन अफ़ग़ानिस्तान तालिबान और पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के संबंधों की बात इसमें है.

तालिबान और आईएसआई के बीच ताल्लुक की बात पहले भी होती रही है.

विकीलीक्स का यह भी कहना है कि आईएसआई ने अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद भारतीय ठेकेदारों को मरवाने के लिए 15 हज़ार डॉलर देने का ऑफ़र भी दिया था.

अमरीका के एक सांसद एड रोएस ने कहा है कि भारत के प्रति पाकिस्तान का रुख "अपनी क़ब्र खुद खोदने के सामान है".

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