बाढ़ की विभीषिका में हज़ारों ने जान गँवाई

पाकिस्तान बाढ़

पाकिस्तान के सूबा सरहद में आई बाढ़ के कारण मरने वालों की संख्या बढ़कर 1100 हो गई है. अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित इलाक़ों में राहत कार्य तेज़ कर दिया गया है.

राहत कार्यों में 30 हज़ार सैनिकों को भी शामिल किया गया है. मानसून की भारी बारिश के कारण कई इलाक़े पूरी तरह डूब गए हैं.

अगले 24 घंटों में और बारिश होने की संभावना है और डर यही है कि कई और इलाक़ों में बाढ़ आ सकती है.

इस्लामाबाद से बीबीसी संवाददाता अलीम मक़बूल का कहना है कि हर प्रभावित इलाक़ों तक पहुँचने के बाद ही इसके असर का असली अंदाज़ा हो पाएगा.

अधिकारियों को डर है कि असली तस्वीर कहीं अब तक के आकलन से ज़्यादा भयावह न हो. ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रांत के आपदा प्रबंधन विभाग का कहना है कि इलाक़े का हवाई सर्वेक्षण किया जा रहा है ताकि बाढ़ के प्रभाव का अंदाज़ा लगाया जा सके.

विभाग के प्रवक्ता लतीफ़ुर रहमान ने कहा, "हवाई सर्वेक्षण से पता चला है कि पूरे के पूरे गाँव बह गए हैं, जानवर डूब गए हैं और अनाजों की भी बर्बादी हुई है. व्यापक विनाश हुआ है."

पाकिस्तान सरकार का कहना है कि शनिवार की रात सैनिकों ने बाढ़ के कारण बुरी तरह प्रभावित इलाक़ों से 19 हज़ार लोगों को सुरक्षित निकाला है लेकिन हज़ारों लोग अब भी फँसे हुए हैं.

प्रभाव

बाढ़ के कारण क़रीब 10 लाख लोग प्रभावित हुए हैं. सबसे ज़्यादा प्रभावित इलाक़ों में शांगला और स्वात के ज़िले हैं, जहाँ कम से कम 400 लोगों की मौत हो गई है.

इन ज़िलों में कई पुल टूट गए हैं. पेशावर, नौशेरा और चरसाड्डा में 700 लोगों की मौत हुई है. पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की नीलम घाटी का संपर्क अन्य इलाक़ों से टूट गया है.

इस तरह की भी रिपोर्टें हैं कि कई इलाक़ों में जलस्तर कम हो रहा है लेकिन अधिकारियों को इस बात की चिंता सता रही है कि आने वाले समय में यहाँ और बारिश होने की संभावना है.

अधिकारियों को ये भी डर है कि ज़्यादा बारिश के कारण बाढ़ का पानी सिंध प्रांत में भी घुस सकता है. सेना और राहतकर्मी सहायता सामग्री पहुँचाने के लिए हेलिकॉप्टरों का इस्तेमाल कर रहे हैं.

सेना ने राहतकार्यों में 43 हेलिकॉप्टरों और 100 से ज़्यादा बोट लगाए हैं. संयुक्त राष्ट्र ने भी सहायता के पाकिस्तान के अनुरोध पर काम शुरू किया है. अमरीका ने भी सहायता सामग्री भेजी है.

संबंधित समाचार