ट्रैफ़िक पुलिस के हाथों में एके 47

  • 10 अगस्त 2010
इराक़ी पुलिस
Image caption इराक़ी ट्रैफिक पुलिस चरमपंथियों के निशाने पर रहे हैं

चरमपंथियों के हमलों से बचाव के लिए इराक़ की राजधानी बगदाद में ट्रैफ़िक पुलिस के हाथों में एके 47 जैसे घातक हथियार थमाए जा रहे हैं.

ग़ौरतलब है कि पिछले 10 दिनों में निहत्थे ट्रैफ़िक पुलिसकर्मियों पर हुए चरमपंथी हमलों में कम से कम 12 पुलिसकर्मी मारे गए हैं.

सर पर नीली टोपी, गहरे रंग के पैंट और सफ़ेद कमीज़ पहने ट्रैफ़िक पुलिसकर्मी बगदाद के ट्रैफ़िक को संभालते रहे हैं.

बगदाद की भीड़ भरी सड़कों पर बसों, ट्रकों, कारों और घोड़े गाड़ियों की चिल्लपो के बीच बिना आपा खोए ये पुलिसकर्मी व्यवस्था को बहाल करने में लगे रहते हैं.

वर्ष 2003 के बाद आश्चर्यजनक रूप से अमरीकी सेना ने ट्रैफ़िक पुलिस की सेवा ख़त्म कर दी थी. इसके बाद हर कोई मनमर्जी से सड़कों पर चलने लगा था.

ट्रैफ़िक पुलिस की बहाली के बाद सड़कों की व्यवस्था फिर से पटरी पर लौट आई है.

निशाने पर ट्रैफ़िक पुलिस

हालांकि ट्रैफ़िक के नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाने की वजह से बगदाद के कुछ इलाक़ों में लोग उन्हें पसंद नहीं करते, लेकिन उनसे किसी को कोई ख़तरा नहीं होता.

इन ट्रैफ़िक पुलिसकर्मियों को चरमपंथी अति आधुनिक हथियारों से अपना निशाना बना रहे हैं.

संभव है कि ये अल क़ायदा के चरमपंथी हो या फिर सद्दाम हुसैन के शासन काल के बचे हुए चरमपंथी जो इसे अंजाम दे रहे हों. या फिर हो सकता है कि दोनों मिल कर पुलिसकर्मियों पर हमले कर रहे हों.

एक ट्रैफ़िक पुलिसकर्मी ने संवाददाताओं को बताया कि वे इन 'कायर आतंकवादियों' से डरने वाले नहीं है.

'बगदाद आपरेशंस कमांड' के प्रवक्ता ब्रिगेडियर क़ासिम अता का कहना है कि ट्रैफ़िक पुलिसकर्मियों की हत्या से 'ّइन चरमपंथी समूहों का दिवालियापन' प्रकट होता है.

उनका कहना है कि ट्रैफ़िक पुलिस को बेवजह निशाना बनाने से यह बात स्पष्ट होता है कि अल क़ायदा और उनके सद्दाम समर्थक दोस्तों को सहयोग नहीं मिल रहा है और वे इराक़ में अपने दिन गिन रहे हैं.

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